2 वर्षों से चल रहे पुनर्वास के मामले में भू अर्जन अधिकारी ने “डूब क्षेत्र से अप्रभावित” होने का हवाला देकर आवेदन निरस्त किये

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पिता की मृत्यु, लंबे संघर्ष और कमिश्नर कोर्ट, हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी फैसला नहीं हुआ : साजिद, मृतक के पुत्र

धरमपुरी (मप्र.) : दो पक्षों में एक भूखंड को लेकर पिछले 3 वर्षों से चल रहे विवादित मामले में एसडीएम प्रमोद गुर्जर (भू अर्जन अधिकारी) ने आवेदक और अनावेदक दोनों के आवेदनों को डूब क्षेत्र से प्रभावित होने का हवाला देकर 4 जून को दिए आदेश में निरस्त कर दिए।

धार जिले के धरमपुरी पुनर्वास का एक बहु चर्चित मामला जिसमें अपने अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते पुनर्वास क्षेत्र के सेक्टर 12, भूखंड क्रमांक 158 के भू-स्वामी की फौत हो गई थी आज उन्हीं मृतक रसीद पिता शरीफ को इंसाफ नहीं मिल सका। नर्मदा डूब प्रभावित क्षेत्र में आवंटित किए गए भूखंडो में 3 अगस्त 2007 को सेक्टर 12 का भूखंड क्रमांक 158 रसीद पिता शरीफ को आवंटित किया गया था। जिसका एटीआर में सरल क्रमांक 582 में विधिवत भूखंड क्रमांक 158 दर्ज होकर 17 वर्ष से कब्जा होना बताया था। बावजूद इसके धरमपुरी के उपयंत्री दीपक गंगराड़े और एसडीओ गजेंद्र मंडलोई द्वारा भूखंड स्वामी रसीद पिता शरीफ को अपने ही भूखंड से वंचित रखा जा रहा था उन्हें निर्माण कार्य में लगातार बाधा पहुंचाई जा रही थी, अंत में उन्हें अवैध बताकर कार्य को रुकवा दिया था। इसके बाद भूखंड स्वामी रसीद कुरैशी लगातार पुनर्वास कार्यालय धरमपुरी के चक्कर लगाते रहे, उन्होंने यह शिकायत जनसुनवाई के दौरान धार कलेक्टर को भी की, लेकिन कोई खास परिणाम नहीं मिला। इसी दौरान एनवीडिए के अधिकारियों की प्रताड़ना से वह सदमे में आ गए थे, उन्हें इंदौर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन वह बच नहीं पाए और 25 मई 2025 को उनकी मौत हो गई थी। जिसके बाद पूरे परिवार ने खुलकर एनवीडिए के अधिकारियों दीपक गंगराड़े, गजेंद्र मंडलोई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था।

26 मई 2025 को पूर्व कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के समक्ष जनसुनवाई में उपस्थित होकर मृतक के पुत्र साजिद कुरैशी की ओर से पुनः आवेदन दिया गया, साथ ही इंदौर संभागायुक्त दीपक सिंह को भी शिकायत की। इंदौर के पूर्व संभाग आयुक्त दीपक सिंह ने मामले को संज्ञान में लेते हुए एक विशेष दल बनाकर जांच के निर्देश दिए थे। मनावर भू अर्जन अधिकारी प्रमोद गुर्जर के मार्गदर्शन में पांच अधिकारियों का दल बनाया गया, जिसने मौक़ा मुआयना किया, भूखंड के मामले की वास्तविकता जानी, दस्तावेज देखे तथा आसपास के लोगों से पूछताछ कर जांच रिपोर्ट तैयार की। पांच अधिकारियों की विशेष दल द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट के अनुसार भूखंड क्रमांक 158 पर रसीद का शरीफ का कब्जा और निर्माण पाया गया था, साथ ही आवंटित भूखंड और एटीआर की सूची में विधिवत नाम दर्ज देखा गया। वहीं भूखंड पर अपना दूसरा पक्ष रखने वाले मनीष पिता प्रकाशचंद के बारे में जांच में पाया गया कि मनीष पिता प्रकाश चंद्र को चार-चार पट्टे एक ही नाम से आवंटित किए गए थे।

जिसमें मनीष पिता प्रकाशचंद को भूखंड क्रमांक 1353, 1363, 1370 उसके बाद 158 क्रमांक का पट्टा बना दिया गया, जबकि आज तक एटीआर की सूची में मनीष पिता प्रकाशचंद्र के नाम का उल्लेख 1363 पर दर्शाया जा रहा है। जबकि सार्वजनिक तौर पर खुलासा है कि रसीद पिता शरीफ को शुरआती दौर से ही 1 ही पट्टा आवंटित हुआ है। फिर एनवीडिए के अधिकारी दीपक गंगराड़े और गजेंद्र मंडलोई किस आधार पर मनीष पिता प्रकाशचंद्र को रसीद पिता शरीफ के 158 भूखंड क्रमांक पर बैठाने का प्रयास करना चाहते थे?

मामला इंदौर संभाग आयुक्त के संज्ञान में पहुंचने एवं जांच रिपोर्ट आने के बाद वर्तमान आयुक्त सुदामा पी खांडे ने आवेदक, अनावेदक सहित भू अर्जन अधिकारी की पूरी टीम को सुना और मामले की गंभीरता तथा दस्तावेजों की जांच करने के बाद भू अर्जन अधिकारी को गुण दोष देखकर निर्णय देने को निर्देशित किया था। समय बितता गया, वही फरियादी साजिद कुरैशी ने उच्च न्यायालय जाकर अपने पिता का अधिकार मांगने के लिए याचिका दायर की। उच्च न्यायालय ने मनावर भू अर्जन अधिकारी को तीन माह के अंदर उक्त मामले के संबंध में निर्णय देने को आदेशित किया गया।

भू अर्जन अधिकारी के आदेश का उल्लेख 

4 जून 2026 को भू अर्जन अधिकारी प्रमोद गुर्जर ने पत्र क्र 804 में आदेश जारी करते हुए दोनों आवेदकों के आवेदन को निरस्त कर दिया। आदेश में बताया गया कि उक्तानुसार दोनों व्यक्ति सरदार सरोवर परियोजना के नवीन बेक वाटर लेवल से वर्तमान में डूब से बाहर है, तदानुसार दोनों के आवेदन पत्र/अभ्यावेदन निरस्त किये जाते है। साथ ही संबंधितों को निर्देशित किया जाता कि वह चाहे तो सरदार सरोवर परियोजना से डूब प्रभावितों की शिकायतों / समस्या के निराकरण किये जाने हेतु शासन द्वारा माननीय शिकायत निवारण प्राधिकरण का गठन किया गया है। उनके समक्ष आवेदन पत्र प्रस्तुत कर सकते है।

मृतक रसीद कुरैशी के पुत्र साजिद ने निराशा जाहिर की

रसीद पिता शरीफ को आवंटित भूखंड क्रमांक 158 के संबंध में भू अर्जन अधिकारी प्रमोद गुर्जर द्वारा हाल ही में दिए आदेश में आवेदको के आवेदन निरस्त किए जाने पर साजिद कुरैशी ने कहा कि, 2 साल से उपरोक्त प्रकरण के मामले में हम अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर लगा रहे हैं पहले धरमपुरी पुनर्वास कार्यालय में पदस्थ एसडीओ गजेंद्र मंडलोई और उपयंत्री दीपक गंगराड़े ने पिता को भरपूर प्रताड़ित किया, जिसके बाद सदमे में आकर उनकी मौत हो गई थी। फिर भी हमने प्रशासन से बड़ी उम्मीद के साथ दोबारा 26 मई 2025 को आवेदन दिए, इंदौर पूर्व कमिश्नर ने हमारे मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच दल भी गठित किया जिसकी रिपोर्ट भी लगभग यह बयान करती है कि भूखंड पर हमारा अधिकार होना चाहिए। लेकिन 2 साल तक चलने वाली प्रकरण के संबंध में हमें इंसाफ नहीं मिला। उन्होंने बताया कि भू अर्जन अधिकारी प्रमोद गुर्जर साहब ने हमारा आवेदन निरस्त करके हमे शिकायत निवारण प्राधिकरण जाने की सलाह दी। साजिद ने कहा कि 2 साल तक लंबित रहे हमारे प्रकरण के इस फैसले से पूरे परिवार को मायूसी हासिल हुई क्योंकि एक तरफ हमने इसी प्रकरण के चलते पिता को खो दिया वही हमारे भूखंड पर भी हमें अधिकार नहीं मिल रहा है। कहा कि धरमपुरी पुनर्वास स्थल में सैकड़ो लोग प्रभावित और अप्रभावित दोनों निवासरत है। वहां सैकड़ो अप्रभावित लोगों ने मकान भी बना लिए गए, लेकिन हमारे ही प्रकरण का फैसला देते समय सभी नियम लागू कर दिए गए? कहा कि मनावर अधिकारी ने दोनों पक्षों बीच चल रहे विवाद का उचित फैसला नहीं देकर बीच में लटका दिया है। मृतक राशिद कुरैशी के परिजनों ने कहा कि अभी सरकार ने अप्रभावितो के भूखंड वापस लेने का कोई नियम नहीं निकाला है। अगर हमारे भूखंड कब्जा हुआ या अधिकारियों ने ना इंसाफी करते हुए जोर जबरदस्ती की तो हम उसी भूखंड पर सामूहिक आत्महत्या करेंगे। उन्होंने कहा कि इसी भूखंड के लिए पिता को खो दिया, अब मौका आया तो अपनी जान भी दे देंगे।

अधिकारियों ने आरोपों की जांच तक नहीं की, उपयंत्री को बचाने का प्रयास?

मृतक रशीद कुरैशी के परिजनों ने कहा कि जग जाहिर है कि हमारे पिता को एसडीओ गजेंद्र मंडलोई और उपयंत्री दीपक गंगराड़े ने बेहद प्रस्तावित किया था, जिसके चलते पिता की मौत हो गई थी। पिता अंतिम समय में बार-बार यही शब्द कहते थे कि दीपक गंगराड़े और मनीष मिलकर अपना भूखंड हड़प लेंगे। और सदमे के चलते पिता की 25 मई 2025 को मृत्यु हो गई थी। हमने अधिकारियों के समक्ष पूरी बात रखी थी और पिता की मृत्यु का आरोप उपयंत्री और एसडीओ पर लगाया लेकिन अधिकारियों ने निचले अधिकारियों को बचाने के लिए उन पर कोई भी करवाई और जांच नहीं की बल्कि हमारे ही भूखंड पर फैसला न देते हुए आवेदन निरस्त कर दिए। परिजनों ने कहा कि हम जीवन काल के अंतिम समय तक हमारे भूखंड की लड़ाई लड़ते रहेंगे और माननीय हाईकोर्ट में दोबारा इस मुद्दे को गंभीरता से रखेंगे।

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