बिहार में बाढ़ का संकट, 6 जिलों के 255 गांव प्रभावित

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गंडक, गंगा और कोसी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर, करीब 4.93 लाख लोग प्रभावित; राहत-बचाव अभियान तेज

पटना। बिहार में मानसून की विदाई शुरू होने के बावजूद बाढ़ का संकट अभी टला नहीं है। नेपाल के पहाड़ी इलाकों में हुई भारी बारिश के बाद गंडक नदी में आए रिकॉर्ड जलप्रवाह ने उत्तर बिहार के कई इलाकों में हालात गंभीर कर दिए हैं। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और दरभंगा समेत छह जिलों में करीब 4.93 लाख लोग प्रभावित हैं, जबकि 255 गांवों में बाढ़ का पानी पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

बिहार सरकार के बाढ़ नियंत्रण आंकड़ों के अनुसार 4 अक्टूबर की सुबह गंडक, गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक, बागमती, घाघरा समेत कई नदियों का जलस्तर विभिन्न स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया। गंडक नदी डुमरियाघाट पर खतरे के निशान से ऊपर है। वहीं पटना के गांधीघाट और हाथीदह में गंगा तथा सुपौल के बीरपुर और खगड़िया के बलतारा में कोसी भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

नेपाल की बारिश बनी बड़ी वजह

बाढ़ के पीछे नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र में 24 से 27 सितंबर के बीच हुई असामान्य रूप से भारी बारिश को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। NASA के उपग्रह आंकड़ों पर आधारित विश्लेषण में भी गंडक नदी के जलग्रहण क्षेत्र में भारी बारिश और उसके बाद बिहार में बढ़े जलप्रवाह का उल्लेख किया गया है। 27 सितंबर को देवघाट में गंडक का जलस्तर 11.94 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

राहत-बचाव अभियान तेज

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन और आपदा राहत दलों को सक्रिय किया गया है। राहत सामग्री प्रभावित गांवों तक पहुंचाई जा रही है और कुछ इलाकों में हेलीकॉप्टर के माध्यम से भी खाद्य सामग्री पहुंचाई गई है। बिहार सरकार ने राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बड़ी संख्या में आपदा राहत टीमों को तैनात किया है तथा केंद्र से भी सहायता मांगी गई है।

सारण में राहत सामग्री के हवाई वितरण के दौरान एक 58 वर्षीय व्यक्ति की मौत की घटना भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार मौत का वास्तविक कारण पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा, जबकि एक अन्य व्यक्ति के घायल होने की जानकारी है।

बारिश थमी, लेकिन खतरा अभी कायम

मौसम विभाग के अनुसार 4 और 5 अक्टूबर को बिहार के लिए कोई विशेष मौसम चेतावनी जारी नहीं है। हालांकि 6 अक्टूबर से कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। ऐसे में नई भारी बारिश का तत्काल खतरा कम दिखाई दे रहा है, लेकिन पहले से बढ़े नदी जलस्तर के कारण निचले इलाकों में बाढ़ का संकट अभी बना हुआ है।

फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित गांवों में लोगों तक भोजन, पीने का पानी, दवाइयां और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पहुंचाना है। नदी के जलस्तर में आने वाली गिरावट पर अब पूरे प्रशासन की नजर है।

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