इजराइल चुनाव में नेतन्याहू गुट बहुमत से दूर, सत्ता गठन पर सियासी खींचतान तेज; अरब दल के पास सत्ता की चाबी!

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53 सीटों पर सिमटा नेतन्याहू का गठबंधन, आईजनकोट के सामने अरब दलों के समर्थन से सरकार बनाने का विकल्प

यरुशलम/नई दिल्ली। इजराइल के संसदीय चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला गठबंधन 120 सदस्यीय संसद (नेसेट) में बहुमत के लिए जरूरी 61 सीटें हासिल नहीं कर सका। वहीं, विपक्षी नेता गादी आईजनकोट के नेतृत्व वाला गठबंधन भी बहुमत से पीछे रह गया है। चुनाव परिणामों के बाद अब सरकार बनाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और जोड़तोड़ का दौर शुरू हो गया है।

मतगणना के उपलब्ध अंतिम आंकड़ों के अनुसार नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं, जबकि गादी आईजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें हासिल हुई हैं। दूसरी ओर, अरब समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दो राजनीतिक दलों जॉइंट लिस्ट और राअम ने मिलकर 19 सीटें प्राप्त की हैं। यह अरब दलों का अब तक का सबसे बड़ा चुनावी प्रदर्शन बताया जा रहा है।

अरब दल बन सकते हैं सत्ता की चाबी

चुनाव परिणामों के बाद अब अरब दलों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। आईजनकोट का गठबंधन यदि इन दलों का समर्थन हासिल कर लेता है तो संसद में उसे बहुमत का आंकड़ा पार करने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, आईजनकोट पहले चुनाव प्रचार के दौरान अरब दलों के साथ गठबंधन करने से इनकार कर चुके हैं। ऐसे में उनके सामने राजनीतिक रुख बदलने या बाहर से समर्थन लेकर अल्पमत सरकार बनाने की चुनौती है।

नेतन्याहू ने लगाए आरोप, विपक्ष ने किया पलटवार

चुनाव में अरब दलों की बढ़त के बाद नेतन्याहू और उनकी लिकुड पार्टी ने मतदान में कथित गड़बड़ियों और विदेशी हस्तक्षेप के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं। चुनाव अधिकारियों ने भी मतदान की विश्वसनीयता को व्यवस्थित रूप से प्रभावित किए जाने के दावों को खारिज किया है। वहीं, आईजनकोट और अन्य विपक्षी नेताओं ने नेतन्याहू पर चुनाव परिणामों को बदनाम करने की कोशिश करने का आरोप लगाया है।

सरकार गठन पर टिकी निगाहें

इजराइल में अब राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। आधिकारिक चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों से विचार-विमर्श कर सरकार बनाने के लिए उम्मीदवार को आमंत्रित करेंगे। यदि कोई भी गठबंधन बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो दोबारा चुनाव की नौबत भी आ सकती है। फिलहाल नई सरकार बनने तक नेतन्याहू कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में पद पर बने रहेंगे।

 

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