हजरत निजामुद्दीन औलिया के 723वें उर्स पर पीएम मोदी का संदेश, कहा— प्रेम, करुणा, सेवा और सद्भाव की परंपरा को आगे बढ़ाएं

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नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर 723वां सालाना उर्स आयोजित किया जा रहा है। उर्स के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों और उर्स में शामिल होने वाले सभी अनुयायियों को शुभकामनाएं दी हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस वर्ष उर्स का आयोजन 29 सितंबर से शुरू होकर 3 अक्टूबर तक चल रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में हजरत निजामुद्दीन औलिया के 723वें उर्स के विशेष अवसर पर सभी अनुयायियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा सदियों से प्रेम, करुणा, सेवा और सद्भाव के मूल्यों से समृद्ध रही है। संतों, गुरुओं, पीरों और फकीरों ने अपने जीवन और विचारों के माध्यम से समाज को मानवता और आपसी सम्मान का मार्ग दिखाया।

पीएम मोदी ने संदेश में कहा कि हजरत निजामुद्दीन औलिया ने भी इस महान परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने मानव कल्याण, सामाजिक समरसता और प्रत्येक व्यक्ति के सम्मान को भारत के राष्ट्रीय मूल्यों से जुड़ा बताया।

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प्रधानमंत्री ने उर्स को हजरत निजामुद्दीन औलिया की शिक्षाओं को स्मरण करने तथा सेवा और सद्भाव के कार्यों से जुड़ने का अवसर बताया। उन्होंने कहा कि सूफी परंपरा ने संगीत, साहित्य और लोक-संस्कृति के माध्यम से भारत की साझा सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया है।

सात सदियों से कायम है निजामुद्दीन की विरासत

हजरत निजामुद्दीन औलिया (1238–1325) चिश्ती सूफी परंपरा के प्रमुख संतों में गिने जाते हैं। दिल्ली स्थित उनकी दरगाह लंबे समय से आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक समरसता के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में जानी जाती है। दरगाह की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे भारत की साझा सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल बताती है।

उर्स के दौरान देश-विदेश से जायरीन दरगाह पहुंचते हैं। कव्वाली, चादरपोशी, दुआ और अन्य धार्मिक कार्यक्रम उर्स की प्रमुख परंपराओं में शामिल हैं।

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