
मनावर : (मप्र.) मनावर नगर में मोहर्रम पर्व का आज समापन हुआ, मोहर्रम की 11वीं तारीख शनिवार रात को इमामबाड़ा से सभी मोहर्रम उठाकर बैंड ताशे के साथ कर्बला यानी नदी ले जाकर ठंडे किए गए। प्रशासन की गाइड लाइन अनुसार शनिवार-रविवार की रात 2 बजे ताजियों को उठाना शुरू कर दिया था। सबसे पहले कई दशक से बनते आ रहे कदमीकाम ताजिया को उठाया गया, उसके पीछे सभी ताजियों ने सिलसिले वार चलना शुरू किया, जिसमें बड़े घोड़े, बस स्टैंड ताजिया, पटवा मोहल्ले का ताजिया, शाह बिरादरी का ताजिया आदि 50 से अधिक ताज़िये शामिल थे। खूबसूर सज्जा के साथ ताजियों को आकर्षण रोशनी और ताजियेदारों के द्वारा इमामबाड़े में या हुसैन, अब्बास अलमदार, जैसे नारे की सदाए गूंज रही थी।

11 दिनों तक चलने वाले इस पर्व के 3 विशेष दिन रहते हैं मोहर्रम के 9, 10 और 11वीं तारीख को विभिन्न धार्मिक आयोजन किए गए। मोहर्रम की 9 तारीख गुरुवार को सभी ताजिये अपने-अपने घरों से बाहर निकाल कर नगर भ्रमण पर रहे। 10 मोहर्रम शुक्रवार को आशूरा की विशेष नमाज अदा की गई। साथ ही इमाम हुसैन की शहादत को याद किया गया। इस अवसर पर नगर के विभिन्न इलाकों में भंडारे और शरबत पिलाने के आयोजन जारी रहे।

10 मोहर्रम शुक्रवार की शाम ताजिये मनावर के अलग-अलग मार्गों से बैंड ताशों के साथ चल समारोह के रूप में निकले। देर रात इमामबाड़ा में सभी ताजिये स्थापित कर दिए गए। 11 मोहरम शनिवार को दिन और रात आयोजन चला। लोगों ने हकीकत के फूल और लुभान जलाकर इमाम हुसैन को याद किया गया। लोग भरे मन से उन्हें याद करते हैं। बड़ी संख्या में महिला पुरुष समाजजनों ने मन्नत के बच्चों को तोला, सेहरे चढ़ाए। देर रात अम्मलनेर, बड़नगर एवं स्थानीय बैंड ताशों के साथ इमाम हुसैन के नाम मर्सिया पढ़ी जा रही थी।

11 मोहर्रम शनिवार की रात सभी ताजिए अपने स्थान से उठकर बोहरा पट्टी, सनन चौपाटी होते हुए कर्बला (नदी) की ओर रवाना हुए जहां रविवार की सुबह उन्हें ठंडा कर दिया गया।

मोहर्रम कमेटी और प्रशासन का विशेष सहयोग रहा
नगर में शहादत के पर्व मोहर्रम के आयोजनों को संचालित करने वाली कमेटी के सदस्य सादिक शेरानी, भोलू शाह ने बताया कि तीन दिनों तक मुख्य रूप से आयोजन रहा जिसमें सभी समाज जनों ने पुलिस प्रशासन द्वारा तय की गई गाइडलाइन का पालन करते हुए पर्व मनाया। नगर में शहर काजी डॉ जमिल सिद्दीकी की अनुपस्थिति में उनके प्रतिनिधि अनवर पठान तथा कमेटी के अन्य सदस्यों ने पुलिस प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए पगड़ी पुष्प माला के साथ सम्मान किया। इस मौके पर पुलिस एसडीओपी बृजेश मालवीय, ईश्वरसिंह चौहान, राजस्व टीम से तहसीलदार विजय तलवारे, उपनिरीक्षक मनोज पाटीदार अपने बल के साथ दौरा करते नजर आए। सुरक्षा के मद्देनजर पूरे शहर के चयनित रास्तों को बंद कर दिया गया।

इमाम हुसैन का इतिहास
इमाम हुसैन, पैगंबर मुहम्मद साहब के नवासे (बेटी फातिमा के छोटे बेटे) थे। वे सातवीं सदी के क्रांतिकारी योद्धा थे, जिन्होंने 680 ईस्वी में जालिम शासक यज़ीद के अन्यायपूर्ण नेतृत्व को मानने से इंकार कर दिया था और सत्य व न्याय के लिए कर्बला की जंग में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया था। यज़ीद ने इमाम हुसैन से अपनी खिलाफत (नेतृत्व) स्वीकार करने का दबाव बनाया। इमाम हुसैन ने इसे इस्लाम के बुनियादी सिद्धांतों और मानवीय मूल्यों के विरुद्ध माना और यज़ीद की अधीनता स्वीकार करने से साफ इंकार कर दिया।










