लखनऊ के विकास नगर की झोपड़ियों में आगजनी के 2 दिन बाद का दृश्य दयनीय

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लखनऊ। लखनऊ में करीब 250 झोपड़ियों के आग में जल जाने के 2 दिन बाद घटनास्थल का दृश्य दयनीय था। 15 अप्रैल की शाम झोपड़ियों में आग लगी। उसके बाद आज 17 अप्रैल को घटनास्थल पर हर तरफ जिंदगी पटरी पर लाने की जद्दोजहद चलती रही। महिलाएं जले हुए बर्तन समेटती दिखीं। आशियाने जलने से महिलाओं के नहाने-खाने की प्राइवेसी भी नहीं रही। एक महिला नहाती है तो दो और महिलाएं उसे साड़ी से ढक रही हैं।

हादसे में जिंदा जलकर मरीं दो बच्चियों की मां पूनम का हाल बेहाल है। वह दो दिन से बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। आज जैसे ही इस बारे में पूछा गया, वह पहले रोईं, फिर बेहोश हो गईं। मौके पर कई गैर सरकारी संगठन और आसपास के युवक मदद के लिए पहुंचे। दूध-बिस्किट और लंच पैकेट बांटने के लिए कार्टन खोले तो छोटे-छोटे भूखे बच्चे लंच पैकेट छीनने लगे। एक डॉक्टर पिछले 3 दिन से लोगों के इलाज और मदद में लगे हुए हैं।

घटना के बारे में जानिए

राजधानी के पॉश इलाकों में से एक विकासनगर में बुधवार शाम करीब 5.30 बजे लगी आग में 30 से ज्यादा सिलेंडर फटे। आग की चपेट में आकर 250 से अधिक झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। करीब 10 किमी. दूर तक धुएं का गुबार दिखाई दिया। आग लगने के बाद एहतियातन आसपास के 20 मकानों को खाली कराया गया। फायर ब्रिगेड की 20 गाड़ियों ने करीब 5 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। इस दौरान इलाके की बिजली काट दी गई। लखनऊ से सांसद और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीएम विशाख जी. को फोन कर घटना की जानकारी ली। वहीं, डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने भी मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया था।

हादसे के दूसरे दिन पुलिस ने बताया कि दो मासूम बच्चों की डेडबॉडी मिली है। उनकी पहचान बाराबंकी के राम सनेही घाट थाना क्षेत्र के काशी पुरवा के सतीश की बेटी थीं। बड़ी बेटी श्रुति 2 साल की थी। वहीं, दूसरी अभी 2 महीने की थी। शासन ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपए का मुआवजा देने की घोषणा की। प्रभावित परिवार को कम्यूनिटी सेंटर-रैन बसेरों में शिफ्ट किया गया है। यहां जिला प्रशासन की ओर से खाने-पीने का प्रबंध किया गया।

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