सूफ़ी संत “शेख अब्दुल्लाह शाह“ बियाबानी का 511वां उर्स का औपचारिक समापन, व्यापारिक मेला रहेगा

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सूफी परंपरा की रूहानी फिज़ा में प्रेम, सद्भाव का संदेश : उमंग सिंगार 

मनावर:- (शाहनवाज शेख) शहंशाहे निमाड़ हजरत शेख अब्दुल्लाह शाह दाता बियाबानी (कालीबावड़ी) नाम से मशहूर दरगाह 14वीं सदी ईस्वी में दिल्ली के सुल्तान बहलोल लोधी से नाराजी के चलते दिल्ली से चलकर मांडू आए। ग्यासुद्दीन खिलजी की सल्तनत में मांडू से नीचे ग्राम छितरी के बियाबान जंगल में 60 वर्ष गुजारने के बाद ईस्वी सन 1529 में देहांत के बाद यही दफनाया गया। तभी से क्षेत्रवासी उनके आस्ताने मुबारक पर उनकी याद में उर्स आयोजित कर रहे हैं। उर्स 8 अप्रैल से शुरू होकर जो 18 अप्रैल तक उर्स का समापन होगा। उर्स में मेले और सूफियाना कव्वाली आकर्षण का केंद्र रहता है।

बियाबानी उर्स कमेटी सदर इरफान मलिक ने बताया 8 अप्रैल बुधवार को बियाबानी आस्ताने मुबारक पर संदल की रस्म सुबह 11:00 बजे एवं चादर शरीफ बाद नमाज जोहर पेश की गई। जिसमें शामिल होने के लिए नगर व क्षेत्र के साथ अन्य शहरों से सभी धर्म के आस्थावान श्रद्धालु अपनी मन्नत पुरी करने पैदल आते हैं। 12, अप्रैल को रात 9 बजे दरगाह प्रांगण में कव्वाली का शानदार मुकाबला हुआ। जिसमें कव्वाल नुसरत कादरी कपासन एवं शाकिब अली साबरी फैजाबाद का मुकाबला हुआ। वही 13 अप्रैल जुनेद सुलतानी बदायूं से हाजी छोटे मजीद शोले ने अपनी कव्वाली पेश की। 14 अप्रैल को महफिलें रंग व कुल की फ़ातेह अदा की गई, कव्वालों ने अपने कलाम पेश करे। जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सूफी, मस्त फकीर सहित राजनेता शामिल हुए।

उर्स में सैकड़ों व्यापारिक दुकानें, झूले, होटल आदि वहां पहुंच लगाई गई हैं। उर्स में रोजाना करीब हजारों श्रद्धालु दर्शनार्थ आते हैं, जिनमें निमाड़, मालवा के साथ अन्य राज्य गुजरात, महाराष्ट्र से भी श्रद्धालु यहां शामिल हैं। उर्स के समापन के बाद आठ दिनों तक मेला व्यापारिक हो जाता है। उर्स में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए नगर से बियाबानी निःशुल्क ट्रक व उर्स में लंगर की व्यवस्था की गई है। उर्स को संपन्न करवाने के लिए कमेटियां बनाकर दायित्व सौंपे गए हैं। कमेटी ने श्रद्धालुओं से उर्स में आने के लिए अपील की है।

बियाबानी उर्स हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक है यहां सालों से दोनों समाज मिलकर उर्स को मनाते हैं, उर्स में शेख अब्दुल्लाह शाह दाता के खानदान के लोग भी शामिल होते हैं। बियाबानी धार जिले के कालीबावड़ी से कुछ दूर जंगल में स्तिथ है। बियाबानी के एक और घने जंगल और मांडव घाट की पहाड़िया है वहीं दूसरी ओर कुछ दूरी पर धरमपुरी नर्मदा नदी है। वर्षों से यह स्थान आकर्षण का केंद्र रहा है।

शेख अब्दुल्लाह शाह दाता का आस्ताना जंगल में होने से उर्स के दौरान धरमपुरी, सहित दर्जनों गावों से बियाबानी दाता के आस्थावान अपने घर बार छोड़ यहां तम्बू में रहकर इबादत करते हैं। उर्स समापन पर ही विदाई लेते हैं।

 

देर रात महफिल-ए-शमा में पहुंचा उमंग सिंगार का काफिला 

उर्स के दौरान कव्वाली के अंतिम दिन यानी की 13 अप्रैल सोमवार को देर रात 2 बजे नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार का काफिला बियाबानी पहुंचा। इस दौरान उनके साथ जिला अध्यक्ष स्वतंत्र जोशी, साबिर भय्यू शेख, शेख अलीम, सोहेल निसार, डॉ जियाउल हक, लाल मोहम्मद शेख, हकिम पठान, असलम जमीदार, जमील शेख सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे। उमंग सिंघार ने दरगाह पर दर्शन करने के बाद कव्वाली के आयोजन में शामिल हुए, जहां उनका साफा पहनाकर सम्मान किया। उन्होंने कहा कि आज हजरत शेख अब्दुल्लाह शाह दाता की याद में आयोजित “महफिल-ए-शमा” कव्वाली कार्यक्रम में शामिल होकर सूफी परंपरा की रूहानी फिज़ा में प्रेम, सद्भाव और भाईचारे का संदेश आत्मसात करने का अवसर मिला। आयोजन समिति को इस सफल एवं भव्य आयोजन के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

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