जंतर-मंतर प्रदर्शन: छात्रों की धरपकड़, विपक्षी नेता हिरासत में; बाहरी लोगों द्वारा छात्रों से मारपीट का आरोप, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल, आज फिर प्रदर्शन

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दिल्ली में CJP के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम, हजारों लोगों को हिरासत में लेने की खबर; आज फिर जंतर-मंतर पर जुटने का आह्वान

नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर शनिवार, 10 अक्टूबर को दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिली। जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश कर रहे छात्र-छात्राओं, युवा कार्यकर्ताओं और विपक्षी नेताओं को पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस के अलावा कुछ अन्य असामाजिक तत्वों ने भी छात्रों के साथ मारपीट की और शांतिपूर्ण विरोध की आवाज दबाने के लिए बड़े पैमाने पर धरपकड़ की गई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को प्रतिबंधों का आधार बताया।

जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही छात्रों को रोका

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब से दिल्ली पहुंचे करीब 200 विद्यार्थियों को जंतर-मंतर की ओर बढ़ते समय हिरासत में लिया गया। कुछ विद्यार्थियों को स्टेडियमों में ले जाया गया, जबकि कुछ को बसों से दिल्ली से दूर सोनीपत रोड की ओर छोड़े जाने की खबर सामने आई। कई अन्य छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं को भी प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले रोका गया।

प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिस पर युवाओं को जबरन गाड़ियों में बैठाने और उनके साथ दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए गए। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस के अलावा अन्य असामाजिक तत्वों ने उन्हें पीटा और धक्का-मुक्की की। छात्राओं के कपड़े खींचने और एक युवक का सिर फटने संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों से नहीं हो सकी है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों का जवाब सामने आना जरूरी है।

हजारों लोगों की हिरासत, विपक्षी नेताओं पर भी कार्रवाई

10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए बड़े पैमाने पर पुलिस कार्रवाई की गई। रॉयटर्स और इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्टों में दो हजार से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने का उल्लेख है। CJP के प्रमुख अभिजीत डिपके सहित आंदोलन से जुड़े नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं को भी हिरासत में लिया गया।

विपक्ष के कई प्रमुख नेताओं को भी प्रदर्शन में शामिल होने की कोशिश के दौरान हिरासत में लिए जाने की खबरें आईं। इनमें ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल और पिनराई विजयन जैसे नेता शामिल बताए गए। इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन और लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

ट्रेनों और मेट्रो सेवाओं पर भी पड़ा असर

प्रदर्शन के मद्देनजर दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। कई प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग और यातायात प्रतिबंध लगाए गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 250 से अधिक ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ा या उन्हें रद्द किया गया। दिल्ली मेट्रो के कई प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार भी अस्थायी रूप से बंद रखे गए।

इन व्यवस्थाओं के कारण दिल्ली पहुंचने वाले यात्रियों, विद्यार्थियों और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि, सभी ट्रेनों के रद्द होने या पूरी दिल्ली की मेट्रो सेवा बंद रहने का दावा सही नहीं है; प्रतिबंध चुनिंदा सेवाओं और स्टेशनों पर लागू किए गए थे।

पुलिस का तर्क—सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जरूरी

दिल्ली पुलिस ने कहा कि नागरिकों को प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन राजधानी में महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थानों की सुरक्षा और आम लोगों की आवाजाही भी सुनिश्चित करनी होती है। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर पर सीमित संख्या में लोगों के एकत्र होने की क्षमता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंध आवश्यक थे।

दूसरी ओर, प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि इन व्यवस्थाओं के नाम पर असहमति की आवाज को दबाया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस के साथ-साथ अन्य असामाजिक तत्वों पर भी छात्रों के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया। दोनों पक्षों के दावों के बीच पुलिस कार्रवाई के तरीके, हिरासत में लिए गए लोगों के साथ व्यवहार और प्रतिबंधों की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं।

आज फिर प्रदर्शन का आह्वान

शनिवार की कार्रवाई के बाद CJP ने रविवार, 11 अक्टूबर को सुबह 10 बजे जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करने का आह्वान किया है। आंदोलन से जुड़े लोगों ने कहा है कि वे मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी मांगें उठाते रहेंगे।

लोकतंत्र में विरोध का अधिकार और कानून-व्यवस्था—दोनों महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में जरूरी है कि प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा हो, पुलिस कार्रवाई पारदर्शी रहे, छात्रों के साथ मारपीट के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और पुलिस या अन्य असामाजिक तत्वों द्वारा किसी भी तरह के दुर्व्यवहार की शिकायत पर जवाबदेही तय की जाए।

स्रोत: रॉयटर्स, इंडियन एक्सप्रेस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस तथा 10–11 अक्टूबर 2026 की अन्य मीडिया रिपोर्टें।

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