
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर सड़क पर विपक्ष और छात्र संगठन; नेहा बोरा समेत सैकड़ों हिरासत में, 7 अक्टूबर को राहुल-प्रियंका गांधी भी पुलिस हिरासत में
नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर और उसके आसपास का इलाका इन दिनों चुनाव व्यवस्था को लेकर चल रहे बड़े राजनीतिक एवं नागरिक आंदोलन का केंद्र बना हुआ है। 2 अक्टूबर से शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन अब लगातार कई दिनों से जारी है। प्रदर्शनकारी मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कथित सवालों पर जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। आंदोलन में छात्र संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता, विपक्षी दल और नागरिक संगठन शामिल हैं।
2 अक्टूबर : गांधी जयंती पर आंदोलन की शुरुआत
2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन प्रदर्शनकारियों ने जंतर-मंतर की ओर मार्च करने की कोशिश की। पुलिस ने इलाके में भारी बैरिकेडिंग कर रखी थी और बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और RTI कार्यकर्ता निखिल डे सहित कई लोग आंदोलन में पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, नेहा बोरा के पहुंचने से पहले ही करीब 500 प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए जा चुके थे। दिनभर में हिरासत में लिए गए लोगों की संख्या 700 से लेकर 1,000 से अधिक तक बताई गई है, अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़े अलग हैं।
दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में प्रतिबंधात्मक आदेश लागू किए थे और बिना अनुमति बड़े जमावड़े तथा प्रदर्शन पर रोक थी। पुलिस का कहना था कि प्रदर्शन के लिए निर्धारित अनुमति नहीं ली गई थी।
3 अक्टूबर : नेहा बोरा समेत करीब 150 हिरासत में
3 अक्टूबर को आंदोलन दूसरे दिन भी जारी रहा। प्रदर्शनकारियों ने पटेल चौक से जंतर-मंतर की ओर मार्च करने का प्रयास किया। इस दौरान नेहा बोरा, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और अन्य प्रदर्शनकारियों समेत करीब 150 लोगों को हिरासत में लिया गया।
इसी दिन प्रदर्शन की कवरेज कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच के लिए शिकायतें क्राइम ब्रांच को भेजीं और CCTV फुटेज की जांच की बात कही।
4 अक्टूबर : तीसरे दिन भी सड़कों पर प्रदर्शन
4 अक्टूबर को प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। AISA, AAP, कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ताओं और नागरिक समूहों ने अलग-अलग स्थानों से जंतर-मंतर की ओर बढ़ने की कोशिश की।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई स्थानों पर धक्का-मुक्की हुई। नेहा बोरा और योगेंद्र यादव समेत करीब 120 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने प्रतिबंधात्मक आदेशों का उल्लंघन किया, जबकि आंदोलनकारियों ने पुलिस कार्रवाई को विरोध दबाने का प्रयास बताया।
इस दौरान जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। कई सड़कें बंद रहीं और यातायात भी प्रभावित हुआ।
नेहा बोरा आंदोलन का प्रमुख चेहरा
पूरे आंदोलन में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा प्रमुख चेहरों में बनी हुई हैं। पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बावजूद उन्होंने समर्थकों से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
4 अक्टूबर के आसपास नेहा बोरा को एक निजी वाहन में ले जाए जाने की घटना भी सामने आई। AISA ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना नंबर प्लेट वाले वाहन में ले जाया गया, जबकि बाद में पुलिस के अनुसार उन्हें नरेला थाने ले जाया गया और रिहा कर दिया गया।
5-6 अक्टूबर : आंदोलन का दायरा बढ़ा
अगले दिनों में आंदोलन केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहा। CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में गतिविधियां बढ़ीं और विभिन्न नागरिक एवं राजनीतिक समूहों ने आगे के कार्यक्रमों की घोषणा की।
प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप मतदाता सूची के SIR को लेकर है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग और भाजपा ने चुनाव प्रक्रिया में किसी राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है।

7 अक्टूबर : आंदोलन में राहुल गांधी की एंट्री
7 अक्टूबर को आंदोलन ने बड़ा राजनीतिक मोड़ लिया। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA ब्लॉक के कई सांसद जंतर-मंतर की ओर मार्च करने पहुंचे।
पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी और राहुल गांधी को पुलिस बस में ले जाया गया।
राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि वह ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था और लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
7 अक्टूबर को राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की हिरासत के मामले में दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस अधिकारियों के साथ हाथापाई और सरकारी काम में बाधा डालने की घटनाएं हुईं।
8 अक्टूबर : आज भी जारी है राजनीतिक हलचल
आज 8 अक्टूबर को भी INDIA ब्लॉक के सांसदों के विरोध प्रदर्शन की तैयारी जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी सांसदों के लिए लंच बैठक बुलाई है और इसके बाद प्रदर्शन की रणनीति तय किए जाने की खबर है। समाजवादी पार्टी समेत कुछ अन्य दलों के भी इसमें शामिल होने की संभावना बताई जा रही है।
इस बीच नागरिक संगठन और छात्र समूह भी आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं। 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर एक और बड़े प्रदर्शन की घोषणा की गई है, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इसके लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया है। आयोजकों का कहना है कि अनुमति नहीं मिली तो जहां पुलिस रोकेगी, वहीं प्रदर्शन किया जाएगा।
आंदोलन की मुख्य मांग क्या है?
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं—
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग।
SIR के तहत मतदाता सूची में हुए बदलावों पर जवाबदेही।
मतदाताओं के नाम हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता।
निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग।
लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही तय करने की मांग।
हालांकि, निर्वाचन आयोग और भाजपा इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए चुनाव प्रक्रिया में किसी तरह के पक्षपात से इनकार करते हैं।
राहुल गांधी के आने से क्यों महत्वपूर्ण हुआ आंदोलन?
2 अक्टूबर को छात्र संगठनों और नागरिक समूहों से शुरू हुआ आंदोलन 7 अक्टूबर तक आते-आते सीधे INDIA ब्लॉक बनाम केंद्र सरकार के बड़े राजनीतिक संघर्ष में बदलता दिखाई दिया।
राहुल गांधी के सड़क पर उतरने, जंतर-मंतर की ओर मार्च करने और पुलिस हिरासत में लिए जाने से इस मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीतिक मंच पर और ज्यादा प्रमुखता मिली। अब विपक्ष इसे केवल SIR का मुद्दा नहीं बल्कि मताधिकार और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर उठा रहा है। दूसरी ओर सरकार और निर्वाचन आयोग प्रक्रिया को वैधानिक और चुनावी शुद्धता से जुड़ा कदम बताते हैं।
आगे क्या?
फिलहाल आंदोलन खत्म होने के संकेत नहीं हैं। 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस और आयोजकों के बीच टकराव की स्थिति बनती दिख रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में जंतर-मंतर और राजधानी के दूसरे हिस्सों में सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक गतिविधियां दोनों बढ़ सकती हैं।
2 अक्टूबर से शुरू हुआ आंदोलन अब केवल जंतर-मंतर का प्रदर्शन नहीं रह गया है। नेहा बोरा जैसे छात्र नेताओं से शुरू हुई सड़क की आवाज अब राहुल गांधी और INDIA ब्लॉक के बड़े राजनीतिक आंदोलन तक पहुंच चुकी है।








