मांडू के बाद अब धरमपुरी में सफाईकर्मियों की हड़ताल, 10 माह से वेतन बकाया

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बकाया वेतन को लेकर कर्मचारियों में आक्रोश, बोले—भूखे रहने की नौबत; सीएमओ पर धमकी देने का आरोप

धरमपुरी/धार। धार जिले में सफाईकर्मियों के बकाया वेतन का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। पर्यटन नगरी मांडू में सफाईकर्मियों की वेतन को लेकर हड़ताल के बाद अब धरमपुरी नगर परिषद के सफाईकर्मी भी 10 माह के बकाया वेतन की मांग को लेकर नगर परिषद प्रांगण में हड़ताल पर बैठ गए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से वेतन भुगतान की समस्या बनी हुई है। बीच-बीच में एक-दो माह का वेतन दिया जाता है, लेकिन इसके बाद फिर कई महीनों का वेतन बकाया हो जाता है।

सफाईकर्मियों का कहना है कि 10 माह से वेतन नहीं मिलने के कारण परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर बच्चों की स्कूल फीस, किराना और मकान का किराया तक चुकाने में परेशानी आ रही है। कर्मचारियों ने नगर परिषद प्रशासन से बकाया वेतन का तत्काल भुगतान करने की मांग की है।

सीएमओ पर धमकी देने का आरोप

सफाईकर्मियों के लीडर रफीक खान ने आरोप लगाया कि जब कर्मचारी बकाया वेतन की मांग लेकर सीएमओ के पास जाते हैं तो उन्हें संतोषजनक जवाब मिलने के बजाय ट्रांसफर करने की धमकी दी जाती है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय से इस समस्या और कथित प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है। रफीक खान के अनुसार इस मामले की जानकारी एसडीएम प्रमोद गुर्जर और जिला कलेक्टर राजीव रंजन मीना को भी दी गई है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।

‘घर में अनाज तक खत्म हो गया’

महिला सफाईकर्मी शाहजा बाई ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वेतन नहीं मिलने से परिवार का गुजारा करना बेहद मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस जमा नहीं हो पा रही है। घर में खाने के लिए अनाज तक खत्म होने की स्थिति बन गई है। किराना दुकानदारों का पैसा और मकान का किराया देना भी मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने कहा कि सफाईकर्मी मजदूर वर्ग से आते हैं और उनकी आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर है। ऐसे में कई महीनों तक वेतन नहीं मिलने से परिवारों के सामने भुखमरी जैसी स्थिति पैदा हो रही है। शाहजा बाई ने आरोप लगाया कि वेतन मांगने पर अधिकारियों की ओर से विभिन्न प्रकार की धमकियां दी जाती हैं। उन्होंने बताया कि पिछले करीब चार वर्षों से सफाईकर्मियों को वेतन भुगतान की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।

गरीब परिवारों के सामने जीवनयापन का संकट

सफाईकर्मियों का कहना है कि अधिकांश कर्मचारी आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आते हैं और कई परिवार गरीबी रेखा के दायरे में हैं। ऐसे में 10 माह का वेतन बकाया रहना उनके लिए गंभीर आर्थिक संकट बन गया है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि जब तक बकाया वेतन के भुगतान को लेकर ठोस समाधान नहीं निकलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

सीएमओ ने कॉल अटेंड नहीं किया

मामले को लेकर जब मीडियाकर्मी ने नगर परिषद धरमपुरी के सीएमओ बलराम भूरे से मोबाइल पर चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने कॉल अटेंड नहीं किया। वहीं नगर परिषद से जुड़े अधिकारी ने बताया कि वेतन भुगतान को लेकर प्रयास जारी हैं और जल्द ही सफाईकर्मियों को वेतन देकर संतुष्ट कर दिया जाएगा।

अब सवाल यह है कि सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले इन कर्मचारियों को अपने ही मेहनताने के लिए कब तक आंदोलन का सहारा लेना पड़ेगा? धरमपुरी में शुरू हुई यह हड़ताल नगर परिषद की वित्तीय व्यवस्था और सफाईकर्मियों के वेतन भुगतान की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर रही है।

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