
20 से 25 जुलाई के छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों पर लगी रोक; गंभीर आपराधिक इतिहास वालों को राहत नहीं
नई दिल्ली। छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 20 से 25 जुलाई के बीच हुए छात्र प्रदर्शनों को लेकर देशभर में दर्ज FIR को बंद करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने अपने असाधारण अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए कहा कि इन घटनाओं के संबंध में किसी भी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में दर्ज मामलों की जांच आगे नहीं बढ़ाई जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के विभिन्न हिस्सों में हुए छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। केंद्र सरकार के साथ-साथ बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम ने भी प्रदर्शन से संबंधित FIR को खत्म करने के लिए शीर्ष अदालत का रुख किया था।

भविष्य में भी नई FIR दर्ज नहीं होगी
अदालत ने स्पष्ट किया कि 20 से 25 जुलाई की संबंधित प्रदर्शन घटनाओं को लेकर किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। शीर्ष अदालत ने सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को भी रिकॉर्ड पर लिया।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन लोगों के लिए अपवाद रखा है जिनका गंभीर एवं जघन्य अपराधों का आपराधिक इतिहास रहा है। दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े करीब 2,873 ऐसे लोगों के खिलाफ अलग FIR आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई है, जिनके संबंध में गंभीर आपराधिक पृष्ठभूमि का उल्लेख किया गया है।
प्रस्तावित 5 सितंबर का प्रदर्शन वापस
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रदर्शन से जुड़े संगठन ने दिल्ली में 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च वापस लेने का फैसला किया है। सरकार की ओर से छात्रों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने और संबंधित मामलों को वापस लेने का आश्वासन दिए जाने के बाद यह घटनाक्रम सामने आया।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को छात्र प्रदर्शनकारियों के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है, वहीं अदालत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल लोगों को सामान्य प्रदर्शनकारियों के समान राहत नहीं मिलेगी।









