
अजमेर। शहर के चौमुखी विकास और पर्यटन सुविधाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अजमेर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले पर्वतपुरा बाईपास पर बुनियादी सुविधा के नाम पर हालात सवाल खड़े कर रहे हैं। बाहरी राज्यों से आने वाली सैकड़ों यात्री बसों के प्रमुख पड़ाव पर आज भी यात्रियों के लिए सुलभ शौचालय कॉम्प्लेक्स तक उपलब्ध नहीं है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पिछले करीब पांच वर्षों से जनता और यात्रियों की ओर से इसकी मांग उठाई जा रही है, तो जिम्मेदारों की नींद आखिर कब खुलेगी?
पर्वतपुरा बाईपास अजमेर आने-जाने वाली बाहरी बसों का प्रमुख केंद्र है। मध्यप्रदेश सहित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण-पूर्वी राज्यों से आने वाली बसें यहां रुकती हैं और बड़ी संख्या में यात्रियों को यहीं उतारा जाता है। रातभर सफर करके सुबह अजमेर पहुंचने वाले यात्रियों में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे भी बड़ी संख्या में शामिल होते हैं। ऐसे में शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा का अभाव सीधे तौर पर यात्रियों की परेशानी बढ़ा रहा है।

पांच साल से मांग, फिर भी नतीजा शून्य
स्थानीय लोगों और यात्रियों के अनुसार पर्वतपुरा बाईपास पर सुलभ शौचालय की मांग लंबे समय से उठाई जा रही है। बताया गया कि यात्रियों की ओर से वार्ड पार्षद पृथ्वी सिंह को भी लिखित पत्र देकर समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस पहल नजर नहीं आई।
शहर के विकास कार्यों के बीच यह सवाल अब और भी तीखा हो गया है कि जब एक महत्वपूर्ण बस पड़ाव पर रोजाना सैकड़ों यात्री पहुंचते हैं, तो वहां शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने में इतनी देरी क्यों?
सुबह उतरते ही यात्रियों के सामने सबसे बड़ी परेशानी
मध्यप्रदेश से अजमेर आने वाले यात्रियों ने बताया कि अधिकांश बसें सुबह के समय पर्वतपुरा बाईपास पहुंचती हैं। रातभर बस में सफर करने के बाद जैसे ही यात्री यहां उतरते हैं, उन्हें सबसे पहले शौचालय की आवश्यकता महसूस होती है। लेकिन आसपास सार्वजनिक सुलभ शौचालय नहीं होने से विशेषकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
यात्रियों का कहना है कि अजमेर जैसे अंतरराष्ट्रीय पहचान वाले धार्मिक और पर्यटन शहर में प्रवेश करते ही यदि यात्रियों को इस तरह की मूलभूत सुविधा के लिए भटकना पड़े, तो यह शहर के विकास संबंधी दावों पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

ख्वाजा की नगरी में जायरीनों की भारी आवाजाही
अजमेर केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर के मुस्लिम समाज के लिए महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र है। यहां स्थित विश्व प्रसिद्ध ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में देश-विदेश से हजारों जायरीन प्रतिदिन पहुंचते हैं। पर्वतपुरा बाईपास पर बाहरी राज्यों से आने वाले यात्रियों की संख्या को देखते हुए यहां मूलभूत सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है।
इन यात्रियों की वजह से होटल, लॉज, खानपान, टैक्सी और अन्य स्थानीय व्यवसायों को भी आर्थिक गतिविधियां मिलती हैं। यानी यात्रियों की सुविधा केवल जनसेवा का विषय नहीं, बल्कि शहर की अर्थव्यवस्था और पर्यटन व्यवस्था से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
जिम्मेदारों से सीधा सवाल—आखिर कब बनेगा सुलभ कॉम्प्लेक्स?
पर्वतपुरा बाईपास पर रोजाना हजारों लोगों की आवाजाही के बावजूद शौचालय जैसी जरूरी सुविधा का अभाव नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है। पांच साल से उठ रही मांग, लिखित शिकायतों और यात्रियों की लगातार परेशानी के बावजूद यदि समाधान नहीं हुआ है तो जिम्मेदारों को जनता के सामने जवाब देना चाहिए।
अजमेर स्मार्ट और विकसित शहर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन शहर के प्रमुख प्रवेश मार्ग पर यात्रियों को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के लिए तरसना विकास के दावों की पोल खोलता है।
अब सवाल सिर्फ सुलभ शौचालय का नहीं, बल्कि जिम्मेदारों की संवेदनशीलता और जवाबदेही का है। आखिर पर्वतपुरा बाईपास पर सुलभ शौचालय कॉम्प्लेक्स कब बनेगा और यात्रियों को यह बुनियादी सुविधा कब मिलेगी?









