ईरान युद्ध में अमेरिका पर बढ़ता दबाव, लंबी जंग से सैन्य संसाधनों और सैनिकों की हालत पर उठे सवाल

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वॉशिंगटन/नई दिल्ली। ईरान के साथ लंबे समय से जारी सैन्य संघर्ष ने अमेरिका के सामने अब कई नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। युद्ध लंबा खिंचने के साथ अमेरिकी हथियार भंडार, सैन्य संसाधनों और सैनिकों की तैनाती को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रशासन के भीतर भी हथियारों की उपलब्धता और युद्ध को आगे जारी रखने को लेकर चिंताएं सामने आई हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी विमानवाहक पोत USS Abraham Lincoln की हो रही है। यह पोत 260 दिनों से अधिक समय से लगातार तैनाती पर रहा है। रिपोर्टों में जहाज पर आपूर्ति की कमी, लंबे समय तक बंदरगाह पर नहीं रुकने और कुछ सैनिकों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का उल्लेख किया गया है। अमेरिकी सांसदों ने भी जहाज पर तैनात करीब 5,000 नौसैनिकों और मरीन की स्थिति की जांच की मांग की है।

हालांकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन चिंताओं को खारिज करते हुए अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती को लेकर कहा कि यह अवधि उनके हिसाब से पर्याप्त भी नहीं थी। अब USS George Washington को क्षेत्र में भेजकर अब्राहम लिंकन को राहत देने की तैयारी की जा रही है।

हथियारों के भंडार पर भी दबाव

ईरान के साथ लगातार सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी हथियारों के भंडार पर दबाव की खबरें सामने आई हैं। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच अमेरिकी युद्ध सामग्री की कमी को लेकर चर्चा हुई थी। इससे यह सवाल उठ रहा है कि अमेरिका लंबे समय तक इसी तीव्रता से सैन्य अभियान जारी रख पाएगा या नहीं।

होर्मुज बना सबसे बड़ा रणनीतिक मोर्चा

ईरान-अमेरिका संघर्ष में होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण मोर्चों में से एक बना हुआ है। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य उसके नियंत्रण में है और अमेरिकी नाकाबंदी खत्म होने तक इसे खोलने की उसकी कोई योजना नहीं है। हाल की रिपोर्टों में भी होर्मुज में समुद्री यातायात के बुरी तरह प्रभावित रहने की बात सामने आई है।

वहीं राष्ट्रपति ट्रंप लगातार होर्मुज पर अमेरिकी नियंत्रण की बात कर रहे हैं और हाल में इसे अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने तक की बात कही है। दूसरी ओर ईरान इसे अपने नियंत्रण में बताता रहा है। इस विरोधाभास ने युद्ध की वास्तविक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस और तेज कर दी है।

ट्रंप के बयानों से बढ़ रही असमंजस की स्थिति?

युद्ध के दौरान ट्रंप के बयानों में बदलाव और अलग-अलग संकेतों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कभी सैन्य दबाव बढ़ाने की बात होती है तो कभी बातचीत और समझौते के संकेत दिए जाते हैं। इससे अमेरिका के सहयोगी देशों और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान के साथ इस लंबे संघर्ष को निर्णायक परिणाम तक ले जा पाएगा या लगातार बढ़ता सैन्य और राजनीतिक दबाव उसे बातचीत की मेज पर लौटने के लिए मजबूर करेगा?

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि युद्ध जितना लंबा खिंच रहा है, अमेरिका के सामने सैन्य संसाधनों, सैनिकों की लंबी तैनाती और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चुनौतियां उतनी ही गंभीर होती जा रही हैं।

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