भोपाल। प्रदेश में पर्यटन, औद्योगिक निवेश एवं विकास परियोजनाओं को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा लैंड बैंक निर्माण की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इस पहल की शुरुआत भोपाल जिले से की गई है, जहां राजस्व विभाग द्वारा भूमि बैंक तैयार करने का कार्य अंतिम चरण में पहुंच चुका है।
राज्य सरकार की इस पहल के तहत राजस्व भूमि का संपूर्ण डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराया जाएगा। इससे निवेशकों को पारदर्शी तरीके से भूमि संबंधी जानकारी प्राप्त हो सकेगी तथा प्रशासनिक स्तर पर इसकी नियमित निगरानी भी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के बाद राज्य शासन के निर्देशानुसार शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य उद्योग, पर्यटन और अन्य जनहितकारी परियोजनाओं के लिए उपयुक्त भूमि की उपलब्धता को सरल और व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत भोपाल से लगभग 200 किलोमीटर के दायरे में करीब 250 एकड़ भूमि निवेशकों के लिए चिन्हित की गई है।
जानकारी के अनुसार, छोटे एवं मध्यम स्तर के निवेशकों द्वारा होटल, रिसॉर्ट और पर्यटन आधारित परियोजनाओं में लगभग 60 करोड़ रुपये तक के निवेश की संभावना जताई जा रही है। मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड द्वारा प्रदेश के विभिन्न जिलों के 25 स्थानों के लिए ओपन टेंडर भी जारी किए गए हैं।
पर्यटन विभाग के अधिकारियों के अनुसार निवेशकों को 30 से 90 वर्षों तक की दीर्घकालीन लीज पर भूमि उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे पर्यटन अवसंरचना के विकास को नई दिशा मिलेगी।
लैंड बैंक योजना के तहत रायसेन जिले के मुरलीखेड़ी और ढकना-चपना क्षेत्र, विदिशा के कागपुर एवं नेहरयाई तथा बैतूल जिले के बोथिया क्षेत्र में पर्यटन परियोजनाओं के लिए भूमि आरक्षित की गई है। इन परियोजनाओं के लिए न्यूनतम पांच करोड़ रुपये निवेश का प्रावधान निर्धारित किया गया है।
भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करना, पर्यटन सुविधाओं का विस्तार करना तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसरों का सृजन करना है।








