राजस्व अभिलेखों में निर्माण का कोई उल्लेख नहीं, फिर सरकारी जमीन पर वर्षों से किराया वसूली किसकी अनुमति से?
धरमपुरी/धार। (शाहनवाज शेख) मध्यप्रदेश में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण और मुख्य मार्गों पर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन द्वारा समय-समय पर कार्रवाई की जाती रही है। वहीं धार जिले के धरमपुरी में शासकीय नर्सरी की भूमि पर बने एक कॉम्प्लेक्स को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला स्टेट हाईवे-38 के मांडव रोड बायपास चौराहे का है, जहां सर्वे क्रमांक 41/1, रकबा 7.208 हेक्टेयर भूमि राजस्व अभिलेखों में शासकीय मद में दर्ज बताई जा रही है। आरोप है कि इसी भूमि के हिस्से में कॉम्प्लेक्स का निर्माण कर कई वर्षों से दुकानों का किराया वसूला जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भूमि शासकीय है और राजस्व अभिलेखों में उक्त निर्माण का कोई उल्लेख नहीं है, तो सरकारी जमीन पर यह कॉम्प्लेक्स कैसे बना? निर्माण के लिए अनुमति किसने दी और वर्षों से किराया वसूली किसकी अनुमति अथवा अधिकार के आधार पर की जा रही है?

तहसील कार्यालय की जानकारी से सामने आया मामला
मामले में सूचना के अधिकार से मांगी गई जानकारी के बाद तहसील कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार संबंधित भूमि सर्वे क्रमांक 41/1, रकबा 7.208 हेक्टेयर वर्तमान राजस्व अभिलेखों में शासकीय मद में दर्ज है। इसके बावजूद भूमि के एक हिस्से में कॉम्प्लेक्स निर्मित होने की बात सामने आई है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त कॉम्प्लेक्स मनीष पिता प्रकाशचंद्र सेठी का बताया जा रहा है। हालांकि शासकीय भूमि पर निर्माण किस आधार पर किया गया, इसके लिए किसी विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं तथा निर्माण की वैधानिक स्थिति क्या है—इन बिंदुओं पर प्रशासनिक जांच आवश्यक है।
वर्षों से किराया वसूली का भी आरोप
स्थानीय स्तर पर यह भी जानकारी सामने आई है कि कॉम्प्लेक्स का निर्माण कई वर्ष पहले पूरा हो चुका है और यहां स्थित दुकानों से लंबे समय से किराया वसूला जा रहा है। लोगों का दावा है कि सरकारी भूमि पर बने इस कॉम्प्लेक्स से अब तक लाखों रुपये की किराया राशि वसूली जा चुकी है?
यदि यह भूमि वास्तव में शासकीय है और निर्माण के लिए कोई वैध अनुमति नहीं है, तो फिर किराया वसूली किस अधिकार से की गई और इससे प्राप्त राशि कहां गई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण विषय है।
व्यस्त चौराहे पर यातायात व्यवस्था प्रभावित
धरमपुरी का मांडव रोड बायपास चौराहा स्टेट हाईवे-38 से जुड़ा होने के कारण अत्यंत व्यस्त क्षेत्र है। खलघाट से मनावर की ओर जाने वाले इस मार्ग पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है। इसी मार्ग को फोरलेन किए जाने की स्वीकृति भी हाल ही में प्रदान की गई है, हालांकि परियोजना के धरातल पर आने में अभी समय लगना बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि चौराहे के समीप बने इस कॉम्प्लेक्स के कारण मांडव रोड की ओर जाने वाला मार्ग संकरा हो गया है। वहीं कॉम्प्लेक्स के बाहर खड़े होने वाले वाहनों के कारण यातायात बाधित होता है और कई बार जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है।
सड़क सुरक्षा के बीच अतिक्रमण बना सवाल
जिले में सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों में यातायात व्यवस्था, दुर्घटनाओं की रोकथाम और मार्गों को सुगम बनाने को लेकर दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। ऐसे में स्टेट हाईवे-38 जैसे व्यस्त मार्ग के किनारे शासकीय भूमि पर कथित अवैध निर्माण और उससे प्रभावित यातायात व्यवस्था को लेकर प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं।
कार्रवाई का इंतजार
मामले को लेकर लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए जनहित में शासकीय भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और सड़क मार्ग को सुगम बनाने के लिए कॉम्प्लेक्स को हटाने की मांग की जा रही है। अब देखना यह है कि राजस्व विभाग और स्थानीय प्रशासन इस मामले में भूमि की वास्तविक स्थिति, निर्माण की अनुमति, निर्माणकर्ता के अधिकार तथा वर्षों से हो रही कथित किराया वसूली की जांच कब शुरू करता है।
सरकारी जमीन पर निर्माण की अनुमति किसने दी, वर्षों तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और किराया वसूली किस आधार पर होती रही—इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।









