देश ने युवाओं को कोई नहीं रोक सकता, कितनी ट्रेनें और सड़कें बंद करोगे : चिराग पासवान

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जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में परिवहन पाबंदियों पर केंद्रीय मंत्री ने उठाए सवाल, कहा—युवा दुनिया को रास्ता दिखाने की क्षमता रखते हैं।

सोनीपत (हरियाणा) केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने 10 अक्टूबर को जंतर मंतर पर होने वाले प्रोटेक्शन के बारे में कहा कि देश के युवाओं को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर कितनी ट्रेनें रोकेंगे और कितनी सड़कों को जाम करेंगे? युवाओं में दुनिया को रास्ता दिखाने की क्षमता है और उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।

चिराग पासवान ने यह बयान शुक्रवार को हरियाणा के सोनीपत स्थित कुंडली के राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (निफ्टेम) में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दिया। उनका बयान दिल्ली में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले सामने आया है।

परिवहन पाबंदियों के बीच युवाओं की ताकत पर जोर

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई है। दिल्ली मेट्रो के 57 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास द्वार बंद करने तथा रेल सेवाओं पर पाबंदियों की व्यवस्था की गई। रेलवे ने 10 अक्टूबर को नई दिल्ली और हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से जुड़ी कुछ ट्रेन सेवाएं भी रद्द कीं। इन कदमों के बीच चिराग पासवान ने परिवहन बाधित करने के प्रयासों पर सवाल उठाए।

उन्होंने युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताते हुए कहा कि भारत का युवा किसी भी चुनौती का सामना कर सकता है। उनके मुताबिक, युवाओं में न केवल अपने विचार रखने, बल्कि दुनिया को दिशा देने की भी क्षमता है।

प्रदर्शन पर क्या बोले चिराग?

चिराग पासवान ने यह भी कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी और उनके सुझाव महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, उन्होंने यह विचार भी रखा कि समस्याओं का समाधान बातचीत से निकलना चाहिए और विरोध प्रदर्शन के दौरान आम लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए।

चिराग पासवान के बयान ने युवाओं की भूमिका, लोकतांत्रिक विरोध और आम नागरिकों की आवाजाही के बीच संतुलन को लेकर चर्चा को फिर सामने ला दिया है।

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