नई दिल्ली : दुनिया इस वक्त ईरान से अमेरिका इजरायल युद्ध के कारण ऊर्जा संकट से जूझ रही है। होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने या नाकाबंदी करने से दुनिया में तरल ईंधन से लेकर व्यापारी माल की आवाजाही प्रभावित हो रही है। बावजूद इसके अमेरिका और इजराइल का रवैया सख्त हैं वह अपनी जिद पर अटल है और इस बीच दुनिया को ऊर्जा संकट में डाल दिया। इतना ही नहीं युद्ध विराम होने के बावजूद भी उधर इसराइल लेबनान पर ताबड़तोड़ बमबारी कर रहा है इस बमबारी में लेबनान के हजारों नागरिकों की जान जा रही है जिसमें बच्चे और महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल है। दुनिया भर में इस नाजायज युद्ध की आलोचना की जा रही है दुनिया वैश्विक और ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा संकट महसूस कर रही है कई देशों में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी कारण हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
हालांकि होर्मुज स्ट्रेट से भारत की ओर आने वाले जहाजो को नहीं रोके जाने की बात ईरान की ओर से कही गई है। लेकिन पूर्ण स्वतंत्रता से आवाजाही नहीं हो रही है। एक तरफ ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाज पर टोल लगाने की बात कही वहीं अमेरिका ने दूसरी ओर दुनिया के किसी भी देश को टोल नहीं देने के लिए जोर डाल रहा है। अमेरिका दुनिया पर लगातार दबाव बनाने के प्रयास कर रहा है। वह अपनी नीति से दुनिया के सभी देशों को संचालित करने की कोशिश करता है। लेकिन इस बार दुनिया के अधिकतम देश विश्व में हो रहे युद्ध को आगे बढ़ाना नहीं चाहते हैं। दुनिया के सभी देश यह समझ रहे हैं कि अगर युद्ध बढ़ता है तो यह एक विकराल रूप तीसरे विश्व युद्ध की ओर बढ़ता चल जाएगा जिसकी चपेट में दुनिया के कई देश और निर्दोष आम जनता आ जाएगी।
2 सप्ताह के युद्ध विराम होने के साथ दुनिया में राहत के साथ ली थी, लेकिन अमेरिका और ईरान द्वारा समझौते में प्रस्तावित शर्तों पर सहमति नहीं बनने पर युद्ध दोबारा शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। भारत में कुछ निजी चैनलों द्वारा बताया गया था की पांच राज्यों के चुनाव परिणाम के बाद भारत में भी डीजल पेट्रोल के दामों में वृद्धि हो सकती है। बीते दिनों महंगाई और वेतन बढ़ाने को लेकर नोएडा के मजदूरों ने हड़ताल और उग्र आंदोलन कर दिया था। ऐसे में जगह-जगह महंगाई को लेकर चिंता जताई जा रही है क्योंकि कमाई के रास्ते कम और बढ़ती महंगाई चिंता का विषय है।
डोनाल्ड ट्रंप को लेकर कई दावे
युद्ध में अहम भूमिका निभा रहे डोनाल्ड ट्रंप को लेकर दुनिया में कई दावे किए जा रहे हैं, लोगों का कहना है कि एपस्टिन फाइल में नाम आने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने मुद्दे से भटजाने के लिए दुनिया को युद्ध की आग में झोंक दिया। ईरान के सुप्रीमो अयातुल्लाह अली ख़ेमनई को मार कर युद्ध की शुरुआत कर दी, जिसके बाद मिडिल ईस्ट सहित दुनिया के अधिकांश देशों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है। वही लोगों का यह मानना भी है कि ट्रंप खुद को पृथ्वी का मालिक समझते हैं और पूरी दुनिया को स्वयं के निर्देश पर चलाने का प्रयास करते हैं। हाल ही में उन्होंने खुद को जीसस यानी कि ईसा मसीह है के रूप में बताकर एक पोस्टर वायरल की थी हालांकि कुछ घंटे बाद वह पोस्ट हटा दी गई थी, इस वजह से भी वह हसी के पात्र बने थे। वह दुनिया में बढ़ रहे संकट को नजरअंदाज कर रहे है और अपनी जिद के आगे दुनिया में मानवीय जीवन पर संकट पैदा कर रहे है।
ट्रंप की पीएम मोदी से चर्चा
बीते दिनों अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी से करीब 30 मिनट से अधिक टेलिफोनिक चर्चाएं की, जिसमें पीएम मोदी ने और होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने के संबंध में जोर दिया।
दुनिया पर रंगदारी और ट्रेड वॉर
डोनाल्ड ट्रंप की ‘रंगदारी’ या अड़ियल नीति ने दुनिया को हिला दिया है। वो ट्रेड वॉर (व्यापार युद्ध) और टैरिफ़ के जरिए 92 देशों पर दबाव बना रहे हैं। उन्होंने नेटो (NATO) सहयोगियों से दूरी बनाई और चीन-ईरान जैसे विरोधियों के साथ-साथ पारंपरिक सहयोगियों को भी अपनी शर्तों पर चलने के लिए मजबूर किया है, जैसा कि इस अल जजीरा रिपोर्ट में बताया गया है।
ट्रंप की ग्लोबल पॉलिसी में टैरिफ को हथियार बनाया है, 92 देशों पर नए टैरिफ लगाकर व्यापार में “अमेरिका फर्स्ट” नीति अपनाई। सहयोगी नेटो देशों को झटका, वाशिंगटन से संबंध ढीले किए। अल जजीरा के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को दरकिनार कर वेनेजुएला और ईरान पर बिना उकसावे के हमले किए। चीन-ईरान पर दबाव बनाया जा रहा है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नाकाबंदी की धमकी। खुद को ‘डीलर’ मानते हुए, अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को ताक पर रखकर अपनी ताकत का प्रदर्शन। असर क्या हुआ?यूरोप एकजुट हो गए अमेरिका की धमकियों के खिलाफ यूरोप का एकजुट होना। विश्व राजनीति में अस्थिरता और अमेरिका की विश्वसनीयता में कमी आई है। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि उनके इस व्यापार युद्ध का भारत पर क्या असर पड़ रहा है?








