
मनावर (शाहनवाज शेख) मनावर में अल्ट्राटेक सीमेंट प्लांट की स्थापना के बाद नगर के आर्थिक और औद्योगिक विकास को नई गति मिली है। पहले जहां मनावर से होकर गुजरने वाले State Highway 37 और State Highway 38 पर सामान्य यातायात रहता था, वहीं अब प्लांट के संचालन के साथ हजारों ट्रक, ट्रेलर और अन्य भारी वाहन दिन-रात सीमेंट एवं कच्चे माल के परिवहन में लगे रहते हैं। यहां निर्मित सीमेंट मध्य प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों और शहरों तक पहुंच रही है।
अल्ट्राटेक से जुड़े कर्मचारी, मजदूर, वाहन चालक और अन्य लोग अपनी दैनिक आवश्यकताओं के लिए मनावर के बाजारों पर निर्भर हैं। इससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिला है। होटल, ढाबा, पेट्रोल पंप, किराना, फल-सब्जी व्यवसाय, वाहन पंचर एवं मरम्मत केंद्र, ट्रेलर-डंपर, ऑटो, टैक्सी, सर्विस स्टेशन सहित अनेक छोटे-बड़े व्यवसायों का विस्तार हुआ है, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।

कंपनी अपने कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (सीएसआर) के तहत क्षेत्र में विभिन्न विकास कार्य भी कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण, स्ट्रीट लाइट, मांगलिक भवन, स्कूल भवन, मेडिकल कैंप, श्मशान घाट का विकास, अस्पतालों को एक्स-रे एवं सोनोग्राफी मशीनें उपलब्ध कराना तथा गौसेवा के लिए विशाल गौशाला का निर्माण जैसे कार्य किए गए हैं। इसके अलावा वाहन चालकों के लिए ट्रेलर ड्राइविंग प्रशिक्षण और ड्राइविंग लाइसेंस संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

प्लांट के संचालन की जिम्मेदारी वर्तमान में यूनिट हेड नितेश निराला संभाल रहे हैं, राजेश जैन उपाध्यक्ष मानव संसाधन, जबकि सीएसआर विभाग के प्रमुख विपिन सक्सेना सामाजिक विकास कार्यों का नेतृत्व कर रहे हैं।

बढ़ते यातायात के अनुरूप सड़कें नहीं
औद्योगिक विकास के साथ मनावर में यातायात का दबाव लगातार बढ़ा है, लेकिन प्रमुख सड़कों की चौड़ाई वर्षों से लगभग अपरिवर्तित बनी हुई है। मनावर से धार, रतलाम, राजस्थान, बड़वानी, कुक्षी, गुजरात, खलघाट, महाराष्ट्र, इंदौर सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ने वाले मार्गों पर प्रतिदिन भारी वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे में सड़कें संकरी होने के कारण जाम और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बढ़ते औद्योगिक और यातायात दबाव को देखते हुए मनावर में शीघ्र रिंग रोड (बायपास) का निर्माण तथा प्रमुख मार्गों का फोरलेन विस्तार किया जाना आवश्यक है। इससे भारी वाहनों और आम नागरिकों दोनों के लिए सुरक्षित एवं सुगम यातायात सुनिश्चित हो सकेगा।








