धार में शुक्रवार, 15 मई 2026 का दिन इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में दर्ज हो गया। इंदौर हाई कोर्ट की डबल बेंच द्वारा भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष के समर्थन में फैसला सुनाए जाने के बाद पूरे शहर में उत्सव का माहौल बन गया। दोपहर 2 बजकर 34 मिनट पर फैसला आते ही “जय मां वाग्देवी” के जयकारों से भोजशाला परिसर और पूरा धार शहर गूंज उठा। वर्षों से चले आ रहे संघर्ष के बाद आई इस जीत ने सनातन समाज की भावनाओं को नई ऊर्जा दे दी।फैसले की खबर मिलते ही हजारों श्रद्धालु भोजशाला परिसर के बाहर स्थित ज्योति मंदिर पहुंचने लगे। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र भगवामय हो गया। ढोल-नगाड़ों की गूंज, उड़ता गुलाल, आतिशबाजी और जयकारों के बीच लोगों ने एक-दूसरे को मिठाइयां खिलाकर खुशी जाहिर की। महिलाओं ने आरती उतारी, बुजुर्गों ने इसे आस्था की जीत बताया और युवाओं ने भगवा ध्वज लेकर जमकर जश्न मनाया।धार शहर में ऐसा माहौल बना मानो एक ही दिन में होली और दीपावली दोनों पर्व उतर आए हों। दिनभर लोगों ने रंग-गुलाल के साथ उत्सव मनाया, जबकि रात होते-होते घर-घर दीप जलाए गए। भोजशाला परिसर के बाहर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कई लोग भावुक होकर मां वाग्देवी का स्मरण करते नजर आए।
इंदौर हाई कोर्ट से लौटे भोज उत्सव समिति के सदस्यों का भी भव्य स्वागत किया गया। महिलाओं ने तिलक लगाकर आरती उतारी और फूल-मालाओं से अभिनंदन किया। लोगों ने इसे दशकों के संघर्ष, आस्था और सनातन गौरव की ऐतिहासिक जीत बताया।फैसले के बाद समाज के लोगों ने मां वाग्देवी की मूर्ति को लंदन से वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने का संकल्प भी लिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, ज्ञान और आस्था का प्रतीक है। अब यहां मां वाग्देवी की भव्य प्राण-प्रतिष्ठा कराने की तैयारी की जाएगी। संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन भी पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहा। भोजशाला परिसर और शहर के प्रमुख इलाकों में करीब दो हजार पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। ड्रोन कैमरों से निगरानी रखी गई और वरिष्ठ अधिकारी लगातार सुरक्षा व्यवस्था पर नजर बनाए रहे।








