नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, सैकड़ों की मौत; प्रधानमंत्री बालेन शाह बोले- राहत और बचाव कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव ने कई इलाकों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस को बड़े पैमाने पर राहत एवं खोज अभियान में लगाया है। प्रधानमंत्री शाह ने प्रभावित लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने और लापता लोगों की तलाश तेज करने पर जोर दिया है।

कई देशों ने मदद का भरोसा दिया

नेपाल में आई इस भीषण आपदा के बाद कई देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने सहायता की पेशकश की है। भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों ने नेपाल के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए राहत एवं मानवीय सहायता का भरोसा दिया है। संयुक्त राष्ट्र ने भी आपदा राहत के लिए सहायता उपलब्ध कराने की घोषणा की है।

हालांकि नेपाल सरकार ने कुछ विदेशी खोज एवं बचाव दलों की प्रत्यक्ष तैनाती के प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया है और अपने सुरक्षा बलों के माध्यम से राहत एवं बचाव अभियान जारी रखा है।

तिब्बत में बनी झील ने बढ़ाई नई चिंता

पहली आपदा से उबरने की कोशिश कर रहे नेपाल के सामने अब एक और बड़ा खतरा मंडरा रहा है। तिब्बत-नेपाल सीमा क्षेत्र में भूस्खलन और मलबे के कारण नदी का प्रवाह बाधित होने से एक अस्थायी झील बन गई है। झील में पानी बढ़ने और उसके ओवरफ्लो होने से निचले इलाकों में फिर अचानक बाढ़ आने की आशंका जताई जा रही है।

28 अगस्त को झील के ओवरफ्लो होने की खबर के बाद प्रभावित क्षेत्रों में फिर से सतर्कता बढ़ा दी गई। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है। अधिकारियों को आशंका है कि यदि झील का प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो बड़ी मात्रा में पानी और मलबा अचानक नीचे की ओर आ सकता है।

हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्राकृतिक खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार इस आपदा में ग्लेशियर, बर्फ और चट्टानों के खिसकने तथा नदी के मार्ग में अचानक बड़ी मात्रा में मलबा आने की भूमिका रही है। हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और झीलों से जुड़ी ऐसी घटनाएं भविष्य में भी गंभीर बाढ़ का खतरा पैदा कर सकती हैं।

नेपाल में फिलहाल राहत और बचाव अभियान जारी है। एक ओर हजारों सुरक्षाकर्मी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर तिब्बत की ओर बनी झील और संभावित दूसरी बाढ़ ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। नेपाल के सामने अब चुनौती केवल मौजूदा तबाही से निपटने की नहीं, बल्कि संभावित दूसरी प्राकृतिक आपदा को रोकने और लोगों को सुरक्षित रखने की भी है।

और पढ़ें