ज्येष्ठ अमावस्या पर इस वर्ष शनि जयंती शनिवार, 16 मई 2026 को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि 13 साल बाद शनि जयंती शनिवार के दिन पड़ रही है, जिसे शनैश्चरी अमावस्या भी कहा जाता है। इस बार शनि जयंती पर सौभाग्य योग, शोभन योग, भरणी नक्षत्र और कृत्तिका नक्षत्र जैसे कई शुभ संयोग बन रहे हैं, जिससे इसका महत्व और अधिक बढ़ गया है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 16 मई सुबह 5:11 बजे से शुरू होकर देर रात 1:30 बजे तक रहेगी, इसलिए शनि जयंती 16 मई को ही मनाई जाएगी।
शनि जयंती पर पूजा का सबसे शुभ समय शाम 7:05 बजे से रात 8:23 बजे तक माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गोधूलि बेला में शनिदेव की पूजा विशेष फलदायी होती है। इस दिन शनिदेव को काला तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और काली उड़द अर्पित करना शुभ माना जाता है। वहीं नीले रंग का अपराजिता फूल, शमी के फूल और ब्लू वॉटर लिली चढ़ाने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं। लाल रंग के फूल जैसे गुलाब और गुड़हल चढ़ाने से बचना चाहिए।
मान्यता है कि शनि जयंती पर जरूरतमंदों को काला तिल, तेल, लोहे की वस्तुएं, छाता, जूते-चप्पल, अनाज और भोजन का दान करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या के प्रभाव में राहत मिलती है। साथ ही “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी की आराधना करने वालों पर शनिदेव की कृपा बनी रहती है, इसलिए इस दिन हनुमान जी को चोला चढ़ाने का भी विशेष महत्व बताया गया है।
ज्योतिष अनुसार इस बार शनि जयंती मिथुन, कुंभ और मीन राशि वालों के लिए विशेष शुभ मानी जा रही है। इन राशियों को नौकरी, कारोबार और रुके हुए कार्यों में सफलता मिलने के योग बन रहे हैं। वहीं साढ़ेसाती और ढैय्या से पीड़ित लोगों के लिए यह दिन उपाय और पूजा के माध्यम से राहत पाने का उत्तम अवसर माना जा रहा है।








