
1972 के दानपत्र में सार्वजनिक उपयोग का उल्लेख, 2.679 हेक्टेयर भूमि तुषार सिंह के नाम दर्ज; अंतरिम रोक की अवधि समाप्त होने के बाद विवाद गहराया
आलीराजपुर, मप्र। शहर के प्रमुख सार्वजनिक खेल परिसर फतेह क्लब की भूमि के स्वामित्व और नामांतरण को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रस्तुत राजस्व दस्तावेजों के अनुसार, सर्वे नंबर 128 की कुल 2.6790 हेक्टेयर भूमि तुषार सिंह के नाम दर्ज की गई, जबकि नगरपालिका ने 1972 के पंजीकृत दानपत्र के आधार पर इस भूमि को फतेह क्लब मैदान बताते हुए अपने नाम दर्ज करने की मांग की थी। अब अंतरिम निषेधाज्ञा की अवधि समाप्त होने के बाद भूमि के संभावित हस्तांतरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह मामला नगरपालिका के 5 सितंबर 2024 के पत्र, 28 अक्टूबर 1972 के पंजीकृत दानपत्र, 3 अगस्त 2022 की कथित वसीयत, 9 सितंबर 2024 के नामांतरण आदेश और वर्तमान खसरे में दर्ज प्रविष्टियों से जुड़ा है। दस्तावेजों के आधार पर भूमि के क्षेत्रफल, स्वामित्व और आपत्तियों के निराकरण को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। हालांकि, कथित साजिश, भ्रष्टाचार या किसी अधिकारी की मिलीभगत के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

1972 के दानपत्र में सार्वजनिक उपयोग का उल्लेख
उपलब्ध दानपत्र के अनुसार, फतेह क्लब भवन, बैडमिंटन हॉल, खेल मैदान और संबंधित खाली भूमि को सार्वजनिक उपयोग के लिए क्लब, खेल मैदान और पार्क के रूप में उपयोग करने का उल्लेख है। दस्तावेज में नगरपालिका परिषद आलीराजपुर को प्रबंधन की जिम्मेदारी दिए जाने की बात भी सामने आती है। इसमें वर्ष 1964 में नगरपालिका को कब्जा सौंपे जाने का उल्लेख बताया गया है।
दानपत्र की संपत्ति-अनुसूची में बैडमिंटन हॉल के उत्तर की ओर स्थित एक भूभाग को दाता की निजी भूमि बताया गया है, जिसका माप 111 फुट उत्तर-दक्षिण और 549 फुट पूर्व-पश्चिम दर्ज है। इन मापों के आधार पर इसका क्षेत्रफल लगभग 0.5661 हेक्टेयर बैठता है।

चार दिन के अंतर में सामने आए दो महत्वपूर्ण दस्तावेज
8 अगस्त 2024 को तुषार सिंह की ओर से नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। आवेदन में स्वर्गीय कमलेंद्र सिंह की वसीयत के आधार पर विभिन्न गांवों के सर्वे नंबरों की भूमि और निर्मित भवनों को अपने नाम दर्ज करने की मांग की गई थी।
21 अगस्त 2024 को कथित तौर पर मृतक के रक्त-संबंधी वंशजों ने कलेक्टर और तहसीलदार के समक्ष आपत्तियां प्रस्तुत कीं। इन आपत्तियों में वसीयत की प्रामाणिकता, वसीयतकर्ता की कथित स्वास्थ्य स्थिति, हस्ताक्षरों और अन्य दस्तावेजों को लेकर सवाल उठाए गए थे। इन आरोपों की पुष्टि सक्षम जांच या न्यायिक निर्णय से होना आवश्यक है।
इसके बाद 5 सितंबर 2024 को नगरपालिका की राजस्व शाखा ने पत्र क्रमांक 4015 जारी कर सर्वे नंबर 128 की 2.6790 हेक्टेयर भूमि को फतेह क्लब मैदान बताते हुए 1972 के दानपत्र के आधार पर नगरपालिका के नाम दर्ज करने का अनुरोध किया। पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व और जिला शहरी विकास अभिकरण को भेजे जाने का उल्लेख है।
लेकिन 9 सितंबर 2024 को तहसीलदार के आदेश क्रमांक 0669/अ-6/2024-25 के माध्यम से सर्वे नंबर 128 की पूरी 2.6790 हेक्टेयर भूमि तुषार सिंह के नाम दर्ज करने का निर्देश दिया गया। उपलब्ध आदेश के अनुसार, इसमें छह व्यक्तियों की आपत्तियां दर्ज थीं। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण है कि नगरपालिका के पत्र और पंजीकृत दानपत्र पर क्या विचार किया गया तथा उनके दावों का आदेश में किस आधार पर निराकरण किया गया।

वसीयत में वर्णित क्षेत्रफल और नामांतरण में बड़ा अंतर
मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू भूमि के माप में सामने आता है। कथित वसीयत के पृष्ठ क्रमांक 7 के खंड ‘K’ में 111×549 फुट की भूमि का उल्लेख बताया गया है। इसकी गणना लगभग 0.5661 हेक्टेयर होती है, जबकि नामांतरण आदेश में पूरे 2.6790 हेक्टेयर क्षेत्र को दर्ज करने का निर्देश है।
दोनों क्षेत्रफलों के बीच लगभग 2.1129 हेक्टेयर यानी 21,129 वर्गमीटर का अंतर है। नामांतरण में दर्ज कुल क्षेत्रफल कथित वसीयत में वर्णित भूभाग से लगभग 4.73 गुना है।
यह अंतर अपने आप में किसी अवैधता का अंतिम प्रमाण नहीं है, लेकिन यह जांच का महत्वपूर्ण आधार अवश्य बनता है कि पूरे सर्वे नंबर की भूमि को निजी नाम पर दर्ज करने के लिए कौन-से दस्तावेज और सीमांकन आधार बने। नगरपालिका के दानपत्र, वसीयत की संपत्ति-अनुसूची, नक्शे और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान इस विवाद के समाधान के लिए जरूरी है।

न्यायालय की अंतरिम रोक की अवधि समाप्त
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 4 फरवरी 2025 के अनुविभागीय अधिकारी के आदेश का उल्लेख वर्तमान खसरे में है। इसके बाद 18 जून 2025 को दीवानी प्रकरण क्रमांक RCSA/21/2025 दाखिल हुआ। 7 अप्रैल 2026 को जिला न्यायाधीश द्वितीय, आलीराजपुर द्वारा छह माह की अंतरिम निषेधाज्ञा जारी किए जाने की जानकारी दी गई है।
बताई गई अवधि के अनुसार, अंतरिम रोक लगभग 6 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई। हालांकि, रोक की अवधि पूरी होने का अर्थ यह नहीं है कि न्यायालय ने भूमि के स्वामित्व पर अंतिम फैसला सुना दिया है या भूमि बेचने की स्वतः अनुमति दे दी है। इसके लिए वर्तमान न्यायिक आदेशों, किसी विस्तार या अन्य प्रभावी प्रतिबंधों की स्थिति की पुष्टि आवश्यक है।
इसी माह नामांतरण आदेश के खिलाफ वंशजों की ओर से दिए गए आवेदन को एसडीएम कार्यालय द्वारा न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के आधार पर खारिज किए जाने की बात भी सामने आई है। संबंधित आदेश की प्रति और उसमें दर्ज कारणों की समीक्षा से ही इस कार्रवाई की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सार्वजनिक मैदान से जुड़ा है शहर का हित
फतेह क्लब परिसर केवल जमीन का एक टुकड़ा नहीं है। स्थानीय स्तर पर यहां खेल गतिविधियां, टूर्नामेंट, बच्चों का अभ्यास, बुजुर्गों की सैर और दशहरा दहन जैसे सार्वजनिक आयोजन होते रहे हैं। ऐसे परिसर के स्वामित्व और भविष्य के उपयोग को लेकर किसी भी प्रकार की अनिश्चितता शहर के नागरिकों के लिए चिंता का विषय है।
यदि नगरपालिका का दावा दानपत्र और अन्य वैध अभिलेखों से समर्थित है, तो उसका विधिवत परीक्षण होना चाहिए। वहीं, निजी पक्ष का दावा भी संबंधित दस्तावेजों और लागू कानून के आधार पर परखा जाना चाहिए। राजस्व रिकॉर्ड में नाम दर्ज होना और किसी संपत्ति का अंतिम कानूनी स्वामित्व सिद्ध होना अलग-अलग विषय हैं।
प्रशासन के सामने उठते प्रमुख सवाल
– 1972 के पंजीकृत दानपत्र में वर्णित सार्वजनिक उपयोग और नगरपालिका के प्रबंधन संबंधी प्रावधानों पर नामांतरण आदेश में क्या विचार किया गया?
– कथित वसीयत में 111×549 फुट भूमि का उल्लेख होने के बावजूद पूरे 2.6790 हेक्टेयर सर्वे नंबर के नामांतरण का आधार क्या था?
– नामांतरण से पहले प्रस्तुत आपत्तियों का किस प्रकार परीक्षण और निराकरण किया गया?
– नगरपालिका के 5 सितंबर 2024 के पत्र पर क्या कार्रवाई हुई?
– वर्तमान में न्यायालय की कोई प्रभावी रोक या अन्य प्रतिबंध लागू है या नहीं?
– सार्वजनिक उपयोग में रहे परिसर के संरक्षण के लिए नगरपालिका और जिला प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं?
इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और सक्षम अधिकारियों के आधिकारिक पक्ष से ही स्पष्ट हो सकेगा।
निष्पक्ष जांच और सार्वजनिक हित की मांग
फतेह क्लब भूमि विवाद में प्रस्तुत दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच, दानपत्र और वसीयत का तुलनात्मक परीक्षण, राजस्व रिकॉर्ड का सत्यापन तथा नामांतरण प्रक्रिया की समीक्षा आवश्यक है। यदि जांच में किसी अधिकारी या अन्य व्यक्ति द्वारा नियमों के उल्लंघन अथवा गलत दस्तावेजों के इस्तेमाल की पुष्टि होती है, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
इस मामले में नगरपालिका, राजस्व विभाग, संबंधित निजी पक्ष और जिला प्रशासन का विस्तृत आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं हो सका है। उनकी प्रतिक्रिया सामने आने पर मामले की दूसरी तरफ भी स्पष्ट होगी।
फतेह क्लब की जमीन का विवाद अब केवल नामांतरण तक सीमित नहीं रहा। यह आलीराजपुर के सार्वजनिक खेल परिसर के भविष्य, नगरपालिका के दावे और राजस्व प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा सवाल बन गया है। नागरिकों की मांग है कि दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच हो और विवाद का समाधान कानून के अनुरूप किया जाए।








