मिट्टी की आड़ में अवैध रेत का व्यापार : ग्राम रतवा बना अवैध उत्खनन का मुख्य केंद्र

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मिट्टी उत्खनन की आड़ में हो रहा रेत का व्यापार, ग्रामीणों ने ड्रोन निगरानी की उठाई मांग

मनावर/धार। धार जिले के मनावर विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत नर्मदा नदी के रतवा, दग्गडपुरा और शरिकपूरा क्षेत्र में एक बार फिर अवैध रेत उत्खनन की गतिविधियां तेज होने की चर्चाएं हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि मिट्टी उत्खनन की आड़ में रेत माफिया ग्राम रतवा में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बजरी निकालकर उसका परिवहन कर रहे हैं।

ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में रेत माफियाओं का एक संगठित नेटवर्क सक्रिय है, जिसे प्रशासनिक और खनिज विभाग की गतिविधियों की पहले से जानकारी मिल जाती है। लोगों का दावा है कि जैसे ही प्रशासनिक या खनिज विभाग की टीम कार्रवाई के लिए रवाना होती है, मौके पर मौजूद जेसीबी, पोकलेन और अन्य मशीनें तत्काल बंद कर दी जाती हैं। टीम के लौटते ही अवैध उत्खनन का कार्य फिर से शुरू हो जाता है।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पूर्व जिला प्रशासन एवं खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी संदेश पिपलोदिया के नेतृत्व में अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन पोकलेन और जेसीबी मशीनों पर कार्रवाई की गई थी। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि इस अभियान से अवैध खनन पर प्रभावी रोक लगेगी, लेकिन अब क्षेत्र में दोबारा नर्मदा नदी से अवैध रेत निकाले जाने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। बताया गया की मिट्टी का व्यापार बताकर रेत उत्खनन की जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि अवैध उत्खनन से शासन को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ नर्मदा नदी के प्राकृतिक स्वरूप और पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। लगातार हो रहे खनन से नदी किनारों पर कटाव बढ़ने और आसपास के क्षेत्रों में भविष्य में खतरा उत्पन्न होने की आशंका भी व्यक्त की जा रही है।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि अवैध रेत कारोबार पर पूरी तरह अंकुश लगाना प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। उन्होंने मांग की है कि संवेदनशील स्थानों पर नियमित निगरानी, आकस्मिक छापेमारी और दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए लंबी दूरी तक निगरानी करने वाले ड्रोन की सहायता से भी अवैध खनन गतिविधियों पर नजर रखी जाए, ताकि नर्मदा नदी में हो रहे अवैध उत्खनन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

राजनीतिक प्रभाव 

सूत्रों के हवाले से यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि कुछ मशीने राजनीतिक संरक्षण में चल रही है अगर अधिकारी उन पर कार्रवाई करते हैं तो वह राजनीतिक प्रभाव दिखाकर उन्हें कार्रवाई से रोक रहे हैं। बताया गया कि इस अवैध कार्य को पूरी तरह से बंद करना नामुमकिन माना जा रहा है। क्योंकि कई लोग ऐसे भी है जो बारिश के दिनों को छोड़ पूरे वर्ष अवैध उत्खनन करते हैं लेकिन मौके पर उनकी मशीन पकड़ में नहीं आती। इसका सीधा मतलब यह हुआ कि अधिकारी के आने से पहले उन्हें पर्याप्त जानकारी मिल रही है।

अधिकारी ने बताया

नायब तहसीलदार संदीप ईवने ने बताया कि, पूरे मामले की जांच करेंगे। अगर कोई मिट्टी की आड़ में अवैध रेत का कारोबार कर रहा है तो विधिवत कार्रवाई की जाएगी।

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