कूनो में फिर गूंजेगी चीते की दहाड़, वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश ने रचा नया इतिहास
मध्यप्रदेश अब सिर्फ “टाइगर स्टेट” तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश में वन्यजीव संरक्षण का सबसे बड़ा मॉडल बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनसे जैव विविधता संरक्षण, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिल रही है।
10 और 11 मई को मुख्यमंत्री श्योपुर जिले स्थित के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान बोत्सवाना से लाई गई दो मादा चीतों को बाड़े से खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यह कदम केवल चीता पुनर्वास परियोजना नहीं, बल्कि विलुप्त होती जैव विविधता को फिर से स्थापित करने की बड़ी पहल माना जा रहा है।
रातापानी टाइगर रिजर्व को मिली नई पहचान
मुख्यमंत्री बनने के बाद डॉ. मोहन यादव ने वन्यजीव संरक्षण को विकास और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम किया। इसी कड़ी में लंबे समय से लंबित रातापानी टाइगर रिजर्व को मंजूरी दी गई। यह देश का 8वां और मध्यप्रदेश का नया टाइगर रिजर्व बना है।
खास बात यह है कि इसका नाम प्रसिद्ध पुरातत्वविद् के नाम पर रखा गया है। राजधानी भोपाल के सबसे करीब स्थित यह टाइगर रिजर्व इको-टूरिज्म और संरक्षण दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
हाथियों के संरक्षण के लिए 47 करोड़ की योजना
राज्य सरकार ने मानव-हाथी संघर्ष कम करने और हाथियों की सुरक्षा के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की योजना लागू की है।
इस योजना के तहत:
- ‘हाथी मित्र’ अभियान
- रेडियो टैगिंग
- सोलर फेंसिंग
- राज्य स्तरीय हाथी टास्क फोर्स
जैसे कई बड़े कदम उठाए गए हैं। वहीं, हाथी हमले में मौत पर मुआवजा राशि 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये कर दी गई है, जिससे प्रभावित परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
टाइगर कॉरिडोर बनेगा भविष्य का संरक्षण मॉडल
वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए सरकार 5500 करोड़ रुपये से अधिक की मेगा टाइगर कॉरिडोर परियोजना पर काम कर रही है।
इस परियोजना के जरिए:
- कान्हा
- बांधवगढ़
- पन्ना
- पेंच
जैसे प्रमुख टाइगर रिजर्व को आपस में जोड़ा जाएगा।
एनएच-46 पर इटारसी-बैतूल सेक्शन में बनाए जा रहे अंडरपास और ओवरपास को देश के सबसे आधुनिक “वाइल्डलाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर” में शामिल किया जा रहा है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए नए प्रयोग
वन्यजीव दुर्घटनाओं को रोकने के लिए भी कई आधुनिक प्रयोग किए जा रहे हैं।
से गुजरने वाले हाईवे पर ‘रेड ब्लॉक’ और ‘टेबल टॉप मार्किंग’ बनाई गई हैं, जिससे वाहनों की गति नियंत्रित रहती है।
वहीं के पास 12 किलोमीटर लंबा साउंडप्रूफ कॉरिडोर तैयार किया गया है। यहां वन्यजीवों के लिए 7 अंडरपास और सड़क किनारे ऊंची साउंडप्रूफ दीवारें बनाई गई हैं।
संरक्षण से बढ़ रहा रोजगार और पर्यटन
चीता परियोजना, टाइगर रिजर्व विस्तार और इको-टूरिज्म गतिविधियों से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय लोगों की आय में भी सुधार हो रहा है।
मध्यप्रदेश अब देश के सामने ऐसा मॉडल पेश कर रहा है, जहां विकास, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय भागीदारी एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।








