मध्य प्रदेश में बढ़ती आत्महत्याएं चिंता का विषय,15 हजार के आंकड़ों के साथ देश में तीसरे स्थान पर एमपी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मध्य प्रदेश में लगातार बढ़ रहे आत्महत्या के मामलों ने सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में एक वर्ष के दौरान 15 हजार 491 लोगों ने आत्महत्या की, जो देशभर में दर्ज कुल मामलों का करीब 9.1 प्रतिशत है। इसी के साथ मध्य प्रदेश आत्महत्या के मामलों में देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है।

रिपोर्ट के अनुसार बीमारी, पारिवारिक तनाव, आर्थिक दबाव, मानसिक अवसाद और भविष्य को लेकर असुरक्षा जैसी वजहें आत्महत्या के प्रमुख कारण बनकर सामने आई हैं। प्रदेश में तीन हजार से अधिक लोगों ने गंभीर बीमारियों से परेशान होकर जान दी। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी और समय पर काउंसलिंग न मिलना भी स्थिति को और गंभीर बना रहा है।

महिलाओं, खासकर गृहिणियों के बीच आत्महत्या के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। घरेलू तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां और आर्थिक परेशानियां इसके पीछे बड़ी वजह मानी जा रही हैं। वहीं युवाओं और छात्रों में भी पढ़ाई का दबाव, प्रतियोगी परीक्षाओं का तनाव और करियर में असफलता का डर मानसिक अवसाद को बढ़ा रहा है।

खेती-किसानी से जुड़े लोगों में भी हालात चिंताजनक बने हुए हैं। फसल नुकसान, बढ़ता कर्ज और आय की अनिश्चितता के कारण किसान वर्ग में तनाव बढ़ा है। इसके अलावा सरकारी और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों में भी अवसाद और मानसिक तनाव के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

एनसीआरबी रिपोर्ट में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर भी मध्य प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। वर्ष 2024 में प्रदेश में महिलाओं से जुड़े 32 हजार से अधिक अपराध दर्ज किए गए। वहीं बच्चों के खिलाफ अपराध, साइबर अपराध और सामाजिक असुरक्षा के मामलों में भी प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल रहा।

अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के खिलाफ अपराधों को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर स्थिति सामने आई है। सामाजिक विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते आत्महत्या और अपराध के मामलों को केवल कानून व्यवस्था से जोड़कर नहीं देखा जा सकता। इसके लिए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और युवाओं को भावनात्मक सहयोग उपलब्ध कराने की तत्काल जरूरत है।

और पढ़ें