आईएएस फार्म हाउस जुआकांड में बड़ा मोड़: हाईकोर्ट ने TI का निलंबन रद्द कर पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

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इंदौर के महू स्थित चर्चित आईएएस फार्म हाउस जुआकांड मामले में हाईकोर्ट ने मानपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी लोकेन्द्र सिंह हिरोरे को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनका निलंबन आदेश रद्द करते हुए पुलिस विभाग की कार्रवाई को मनमाना, दिखावटी और प्रतिशोधात्मक करार दिया है।

दरअसल, महू में आईएएस अधिकारी वंदना वैद्य के फार्म हाउस पर पुलिस ने 10 मार्च को छापा मारकर 18 जुआरियों को गिरफ्तार किया था। इस कार्रवाई के बाद थाना प्रभारी लोकेन्द्र सिंह हिरोरे समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया था। इसके खिलाफ हिरोरे ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

याचिका में थाना प्रभारी ने आरोप लगाया था कि उन पर दबाव बनाया गया था कि एफआईआर में आईएएस के फार्म हाउस का जिक्र न किया जाए और घटना को किसी अन्य स्थान का बताया जाए। लेकिन उन्होंने पूरी सच्चाई के साथ एफआईआर दर्ज की, जिसके बाद रातोंरात निलंबन का आदेश जारी कर दिया गया।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कई अहम सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब आईएएस के फार्म हाउस पर जुआ पकड़ा गया तो संबंधित अधिकारी के बयान क्यों नहीं लिए गए। साथ ही अदालत ने यह जानना चाहा कि फार्म हाउस में सीसीटीवी कैमरे क्यों नहीं लगे थे। जवाब में बताया गया कि वहां सीसीटीवी नहीं थे, जिस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताया।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों का प्रतिवादियों ने कोई स्पष्ट खंडन नहीं किया। इससे यह साफ होता है कि निलंबन आदेश प्रतिशोध की भावना से जारी किया गया था। अदालत ने माना कि उच्च स्तर के निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण थाना प्रभारी पर कार्रवाई की गई।

कोर्ट के फैसले के बाद लोकेन्द्र सिंह हिरोरे की बहाली का रास्ता साफ हो गया है। निलंबन के बाद उन्हें बुरहानपुर भेज दिया गया था। वहीं इस पूरे मामले ने पुलिस प्रशासन और उच्च अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

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