भोजशाला समाचार:
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद शनिवार सुबह धार की भोजशाला में श्रद्धालुओं और हिन्दू संगठनों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में लोग भोजशाला पहुंचे और मां वाग्देवी के स्थान पर श्रद्धा भाव से पूजा-अर्चना की। प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और पूरे परिसर में पुलिस बल तैनात रहा।
सुबह श्रद्धालुओं ने यज्ञ कुंड के पास फूल अर्पित कर दंडवत प्रणाम किया और मां वाग्देवी का स्मरण किया। कई लोगों ने इस फैसले को वर्षों पुरानी आस्था और सांस्कृतिक पहचान की जीत बताया। श्रद्धालुओं का कहना था कि लंबे समय बाद उन्हें खुले रूप से पूजा करने का अवसर मिला है।
गौरतलब है कि शुक्रवार को इंदौर हाईकोर्ट की बेंच ने भोजशाला मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए परिसर को प्राचीन वाग्देवी मंदिर माना। कोर्ट ने यह भी माना कि यह स्थल राजा भोज के काल से जुड़ा हुआ है। फैसले के बाद हिन्दू पक्ष ने लंदन में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाकर भोजशाला में स्थापित करने की मांग दोहराई।
लंदन के संग्रहालय में रखी है वाग्देवी प्रतिमा
बताया जाता है कि करीब 117 वर्ष पहले अंग्रेज वाग्देवी की प्रतिमा को अपने साथ लंदन ले गए थे। तब से यह प्रतिमा वहां के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है। अब श्रद्धालु और हिन्दू संगठन प्रतिमा को वापस भारत लाने की मांग उठा रहे हैं।
भोज उत्सव समिति के संरक्षक विश्वास पांडे, भोजशाला मुक्ति यज्ञ के संयोजक गोपाल शर्मा, शिरीष दुबे और अशोक जैन सहित कई पदाधिकारी भी भोजशाला पहुंचे। सभी ने विधि-विधान से पूजा-पाठ कर फैसले का स्वागत किया। गोपाल शर्मा ने कहा कि भोजशाला का हर हिस्सा इसकी प्राचीन मंदिर परंपरा की गवाही देता है और अब श्रद्धालु नियमित पूजा कर सकेंगे।
कुछ श्रद्धालुओं को प्रवेश से रोका गया
शनिवार को अखंड ज्योति मंदिर से कुछ श्रद्धालु मां वाग्देवी और भगवान हनुमानजी के चित्र लेकर भोजशाला पहुंचे थे, लेकिन पुलिस और पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने उन्हें अंदर जाने से रोक दिया। अधिकारियों का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह अध्ययन होने तक प्रतीक्षा करना जरूरी है।
प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पूरे धार शहर में पुलिस निगरानी बढ़ा दी है। बाहर से आने वाले लोगों की जांच की जा रही है और संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।








