
धरमपुरी/ धार – आज संभाग आयुक्त डॉ सुदामा पी खाड़े ने सरदारा सरोवर परियोजना के डूब प्रभावितों को भूखंड रजिस्ट्री हेतु धार जिले के धरमपुरी में आयोजित दस्तावेज सत्यापन शिविर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों की समस्या सुनी एवं त्वरित निराकरण के निर्देश दिए गए। संभाग आयुक्त ने कहा कि ग्रामीण के दस्तावेजों की सही जांच करे एवं हर व्यक्ति को उनका अधिकार मिले। साथ ही उन्होंने आगामी त्यौहार महाशिवरात्रि की व्यवस्थायों को लेकर नर्मदा स्थित भेट का भी दौरा किया। इस अवसर पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, एसपी मयंक अवस्थी, एनवीडीए अधिकारी सपना जैन, पूर्णिमा सिंघी, एसडीएम प्रमोद गुर्जर, आरआई राम चौहान, नपा अध्यक्ष प्रतिनिधि डॉ जियाउल हक एवं धरमपुरी से प्रशांत विनोद कुमार, नपा उपाध्यक्ष, एड. दीदार खा सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।

आपको बता दे कि मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने नर्मदा बचाओ आंदोलन की ओर से मेधा पाटकर द्वारा दायर जनहित याचिका (WP No. 35006/2024) पर सुनवाई करते हुए सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों के लिए एक ऐतिहासिक राहतभरा आदेश पारित किया है सरोवर बांध परियोजना अंतर्गत पूर्व में हजारों प्रभावितों को सरकार ने तत्कालीन समय में पुनर्वास स्थल बनाकर भूखंड आवंटित कर एटीआर सूची में नाम दर्ज किए थे, इसके बाद से ही प्रभावित लोग अपने भूखंडों पर काबिज है। भूखंड आवंटित होने के बाद से ही भूखंडों का पंजीयन एवं नामांतरण नहीं हो पाया था, जिसको लेकर उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी। जिसकी सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने सरदार सरोवर परियोजना के विस्थापितों को बड़ी राहत देते हुए आवंटित पुनर्वास भूखंडों की रजिस्ट्री दो महीने में करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि भारतीय पंजीकरण अधिनियम, 1908 की धारा 17 के तहत विस्थापितों के पक्ष में यह रजिस्ट्री अनिवार्य है। इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए जिला मुख्यालयों पर विशेष शिविर आयोजित किए जा रहे। उच्च न्यायालय ने कहा कि कलेक्टर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनेगी, जिसमें एसडीएस, तहसीलदार और उप पंजीयक (मुद्रांक) शामिल होंगे, जो नामांतरण और दस्तावेज़ीकरण की जिम्मेदारी संभालेंगे। यह आदेश मेधा पाटकर (नर्मदा बचाओ आंदोलन) द्वारा दायर याचिका पर आया था। इसके साथ ही भविष्य के विवादों से बचने के लिए, रजिस्ट्री में भूखंड की सही पहचान (आकार, दिशा, सीमाएं) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। पुनर्वास नीति के अनुसार विस्थापितों को आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री पर स्टाम्प फीस व शुल्क के नियमों का पालन किया जाना है। यह आदेश सरदार सरोवर बांध प्रभावित व्यक्तियों को जमीन के मालिकाना हक का अधिकार सुरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।

तत्कालीन समय में भूखंड आवंटन में कई गड़बड़ियां
पुनर्वास भूखंड आवंटन के दौरान तत्कालीन अधिकारियों द्वारा कई गड़बड़ियों की गई थी, जो अब सामने आ रही है जिसके परिणाम स्वरूप आज तक लोग परेशान हो रहे हैं। हाल ही में एक चर्चित प्रकरण जिसमें धरमपुरी के सेक्टर नंबर 12, भूखंड क्रमांक 158 के भूखंड स्वामी रसीद पिता शरीफ अपने ही अधिकार के लिए लड़ते-लड़ते फौत हो गए। 26 मई 2025 को उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र साजिद कुरैशी इस प्रकरण को लेकर कार्यालयो के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अभी तक समस्या का समाधान नहीं हुआ। जबकि संभाग आयुक्त के कार्यालय में प्रकरण चलने के बाद कार्यालय से उक्त प्रकरण के संबंध में दिशा निर्देश दे दिए गए हैं, लेकिन एनवीडिए कार्यालय नर्मदा भवन इंदौर से अभी तक प्रकरण की फाइल मनावर तक नहीं भेजी? विभाग के यह लापरवाही चर्चा का विषय बना हुआ है।








