महेश्वर में बैंगलोरी मस्तान का 11वा उर्स संपन्न हुआ, कुल की फातिहा के बाद विशाल भंडारे का आयोजन रहा

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महेश्वर: (मप्र.) निमाड़ में जब सूफी संतों के नाम का जिक्र किया जाता है तो महेश्वर के बैंगलोरी मस्तान और मद्रासी बाबा के नाम को भी बड़े अकीदत के साथ याद किया जाता है। पिछले दिनों से हजरत सय्यदी बैंगलोरी मस्तान का 11वां उर्स संपन्न हुआ। लाखों की तादात में श्रद्धालुओं ने भरपूर आनंद लिया, इस दौरान बाबा के आस्ताने पर संदल, चादर, कव्वाली और लंगर जैसे धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रम हुए सूफी संत, मस्त मलंगों की टोली भी मस्तानजी की याद में मस्त थी।

उर्स की शुरुआत 6 फरवरी से हुई है, जो 9 फरवरी तक रहेगी। 7 फरवरी शनिवार को चादर संदल एवं मुशायरा का आयोजन रहा, वही 8 फरवरी रविवार को मस्तानजी की शान में कव्वाली पड़ी गई। जिसमें कव्वालों ने जनता की महफिलों को अपने शायराना अंदाज से लूट लिया। सोमवार को रंग की महफिल के साथ कुल की फातिहा हुई। इसके पश्चात विशाल भंडारे की उचित व्यवस्था रही। महेश्वर आए लाखों की तादात में श्रद्धालुओं ने उर्स का आनंद लिया। मस्तान जी की दरगाह पर उर्स के पूरे दिनों में अकीदत के फूल, इत्र, खुशबू जैसे आयोजन लगातार चलते रहे। कमेटी की ओर से भी उर्स की चादर-फूल और इत्र पेश किया।

उर्स में हुए आयोजन के मुख्य अतिथि राजकुमार मेंव, महेश्वर विधायक और विक्रम पटेल मंडल अध्यक्ष रहे। वही विशेष अतिथि के रूप में डॉ विजयलक्ष्मी साधो पूर्व मंत्री रहे। आयोजन की अध्यक्षता गजराज यादव (नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि) ने की। उर्स की व्यवस्थाओं और सुचारू रूप से आयोजन संचालित करने की भूमिका उर्स कमेटी के सदर सगीर कुरैशी, सेक्रेटरी राजू खान और कोषाध्यक्ष आशिक शेख की भूमिका रही। कमेटी के अन्य सदस्यों ओर राहुफ शेख, सादर मुस्लिम जमात महेश्वर, नेमूकाकाजी, मजहर भाई (पार्षद) शहरी अंसारी आदि साथियों के सहयोग की सराहना की गई। उर्स की व्यवस्थाओं और सड़कों, मुख्य मार्गों पर यातायात को संचालित करने के लिए पुलिस प्रशासन ने भी अपना बल सड़कों पर लगा दिया था। दिन रात पुलिस जवानों ने उर्स को संपन्न कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

तीन दिन तक रहा मस्तानजी का उर्स

मस्तानजी ने वर्ष 2015 में पर्दा किया, इसके बाद से हर साल उनके उर्स का आयोजन किया जाने लगा। इस साल उनका 11वां उर्स मनाया जा रहा है। इसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक सहित अन्य राज्यों से डेढ़ से दो लाख तक अनुयायी शामिल हुए। श्रद्धालुओं फरीद खत्री, आरिफ मस्तान, यूनुस अगवान, आदि में बताया कि लोग बैंगलौरी मस्तान के दीवाने थे और आज भी उनके पर्दा लेने के बाद भी लोग पूरे साल यहां आते है और अपने मन्नते मांगते है।

आज भी मशहूर है चमत्कारों के किस्से

बाबा के अनुयायी उनके चमत्कारों के कई किस्से सुनाते हैं बताया जाता है कि कर्नाटक के मुर्कमुल्ला गांव में स्थित अम्मा जान-बाबा जान दरगाह पर बाबा ने करीब 12 साल तक साधना की थी। इसी दौरान उन्हें विशेष शक्तियां मिलीं. लोग मानते हैं कि उनकी डांट या सख्ती से भी बीमार लोग ठीक हो जाते थे। एक व्यक्ति जो चल नहीं पाता था, बाबा के आशीर्वाद से चलने लगा। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्हें दूर की बातें भी पता चल जाती थीं।

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