होली का पर्यावरणीय महत्व।

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भक्त प्रहलाद और होलिका की कथा हम सब ने पाठ्यपुस्तकों में पढ़ी है और टीवी धारावाहिकों में अच्छी तरह से देखी भी है। जिस तरह विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है ठीक उसी तरह होली का पर्व भी बुराई पर अच्छाई की जीत और भक्ति की शक्ति प्रदर्शित करता है। 

होलिका दहन पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

इस समय आपने देखा होगा कि आपके आसपास लोगों को बिना कारण ही सर्दी होने लगती है जबकि यह तो ठंड का मौसम भी नहीं है, पर चिकित्सक हमें कहते हैं कि ठंड के कारण कभी भी सर्दी नहीं होती है, सर्दी होने का मुख्य कारण हमारा वायरस और बैक्टीरिया के संपर्क में आना होता है। तो इस समय हर जगह वातावरण में विषाणु फैले हुए होते हैं जिनके संपर्क में आने से हमें सर्दी हो जाती है।

तो इन विषाणुओं को खत्म करने के लिए हम होलिका दहन में महत्वपूर्ण पेड़ों की सूखी पत्तियों को कण्डों के साथ जलाते हैं जिसके धुएं से इन विषाणुओं का अंत होता है और पूरे वातावरण की शुद्धि हो जाती है।

आकाश शर्मा

एम.ए.(हिंदू अध्ययन)

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Author: SinghamTimes

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