स्टेट हाईवे 38 के मुख्य सड़क मार्ग पर लगा हाट बाजार, रेंग रेंग कर निकले वाहन, दुर्घटना होने पर कौन होगा जिम्मेदार?

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मनावर : मप्र.- (सिंघम रिपोर्टर) स्टेट हाईवे 38 मनावर से खलघाट की ओर जाने वाले मार्ग पर हर शुक्रवार को लगने वाले हाट बाजार की वजह से वाहनों के चक्के जाम हो गए। सुबह से लेकर देर शाम तक सड़क पर लंबा जाम लग रहा। नगर ओर ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले व्यापारियों की दुकान सड़कों के किनारे लगा दी गई। इस कारण खरीदी करने के लिए आमजन सड़कों पर दिखाई दिए, इसी बीच स्टेट हाईवे 38 से गुजरने वाले यातायात को दिन भर परेशानी का सामना करना पड़ा। इस मुद्दे को पूर्व में भी कई बार गंभीरता से प्रकाशित किया गया था, जिसके बाद नगर पालिका मुख्य अधिकारी संतोष चौहान ने स्टेट हाईवे की सड़क किनारे पर दुकान नहीं लगाने के निर्देश दिए थे परंतु कुछ समय बीत जाने के बाद वही स्थिति पुनः दिखाई देने लगी है।

दुर्घटना का जिम्मेदार कौन?

स्टेट हाईवे से गुजरने वाले यातायात के बीच सैकड़ो की संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे भी सड़कों पर साप्ताहिक खरीदी करते दिखाई देते हैं। ऐसी दशा में वाहनों की चपेट में आने से दुर्घटना होने का भय बना रहता है। दुर्घटना होने पर किसे कसूरवार माना जाए यह भी एक विचाराधीन मामला है। या तो इसे नगरीय प्रशासन की लापरवाही माना जाए या किसी अन्य विभाग की? क्योंकि हाट बाजार के दिन आमजन के बीच से छोटे-बड़े वाहनों का लगातार गुजरना मानव सुरक्षा के खिलाफ एक बड़ा कदम है। नगर पालिका ने बैठक पर्ची काटने वालों को बैठक शुल्क वसूलने का दायित्व दिया है तो साथ ही उन्हें यह भी अधिकार दे कि वह नगर पालिका से तालमेल मिलाकर इन दुकानों को सड़क किनारे न लगने दे। साथ ही नगर पालिका के कर्मचारी सुबह के वक्त इन स्थानों का निरीक्षण करे जिससे दुकानें अंदर की ओर लगाई जाए और यातायात को सुचारू रूप से संचालित किया जा सके।

बाईपास को लेकर भी विधानसभा में लगातार उठाएं मुद्दे 

मनावर में बाईपास निर्माण की मांग को लेकर भी पिछले कई वर्षों से विधानसभा में कई बार मुद्दे उठ चुके हैं लेकिन कम जनसंख्या का हवाला देकर इस कार्य को लंबित किया गया। जबकि यातायात का दबाव अत्यंत बढ़ते जा रहा है और दिन प्रतिदिन दुर्घटनाएं भी तेज हो गई है ऐसी दशा में मनावर के नागरिकों की सुरक्षा के लिए बाईपास रिंग रोड का निर्माण करना अति आवश्यक हो गया है। सरकार इस गंभीर मुद्दे पर विचार करते हुए तत्काल प्रभाव से इस योजना को हरी झंडी देना चाहिए। क्योंकि मनावर के गांधी चौराहे से लेकर टोंकी फाटे तक यह मार्ग रेड जोन एरिया में शामिल हो चुका है। कई बार दुर्घटना हो चुकी है इसके बाद भी अभी तक इसका कोई उचित निराकरण नहीं हुआ।

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