विधायक निधि : क्या होती है, कहा खर्च की जाती है, कैसे होता है इसका उपयोग, सूचना के अधिकार में कैसे मांगे इसकी जानकारी,- देखे खास खबर

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मनावर : (विशेष प्रतिनिधि) देश के हर राज्यों में विधायको को अपने विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए एक निश्चित वार्षिक निधि मिलती है, जिसे विधायक निधि कहते हैं। यह राशि हर राज्य में अलग-अलग होती है, और इसे खर्च करने के लिए भी कुछ नियम होते हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने विधायकों की स्थानीय निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए प्रतिवर्ष पांच करोड़ रुपये मिलेंगे, जो अभी ढाई करोड़ रुपये है। यह निर्णय आगामी बजट में घोषित किया जाएगा और वित्तीय वर्ष 2026-27 से प्रभावी होगा। क्या आपके विधानसभा क्षेत्र में भी विधायक द्वारा इस निधि का सही उपयोग करते हुए जनहित के कार्य किया जा रहे या नहीं? आप इसे सूचना के अधिकार में जानकारी प्राप्त कर सकते है। आज आपको बताते है कि विधायक निधि की राशि, विधायक निधि का उपयोग ओर विधायक निधि के खर्च के संबंधित नियम क्या होते हैं।

विधायक निधि की राशि

चूंकि यह राशि राज्य सरकारों द्वारा तय की जाती है, इसलिए हर राज्य में अलग-अलग होती है। उदाहरण के लिए देखे तो अगस्त 2025 में मध्य प्रदेश सरकार ने विधायक निधि को दोगुना करके प्रति वर्ष 5 करोड़ रुपये कर दिया। ऐसे ही साल 2022 में उत्तर प्रदेश में विधायक निधि की राशि 3 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये प्रति वर्ष कर दी गई थी। वही मई 2025 में, दिल्ली सरकार ने विधायक विकास निधि (एमएलए-एलएडी) को 15 करोड़ रुपये से घटाकर 5 करोड़ रुपये कर दिया और मार्च 2025 में, जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधायकों को सालाना 3 करोड़ रुपये आवंटित करने का निर्णय लिया था।

विधायक निधि का उपयोग

विधायक को इस निधि का उपयोग अपने क्षेत्र में सामुदायिक महत्व के स्थायी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए करना होता है, लेकिन यह निधि इन कार्यों में उपयोग की जा रही है या नहीं? यह जानना भी विधानसभा क्षेत्र के आमजन का अधिकार है।

हालांकि इन कार्यों के लिए कुछ सामान्य दिशानिर्देश होते हैं, जैसे :

बुनियादी ढाँचा : सामुदायिक भवनों, सड़कों, पुलिया और फुटपाथों का निर्माण।

शिक्षा : सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में स्मार्ट क्लास और कंप्यूटर जैसे उपकरण उपलब्ध कराना।

स्वास्थ्य : प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और सामुदायिक शौचालयों का निर्माण।

स्वच्छता और पेयजल : पेयजल आपूर्ति, जल निकासी और ठोस-तरल अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित कार्य।

खेल सुविधाएं : मिनी स्टेडियम, ओपन एयर जिम और व्यायामशालाओं का निर्माण।

अन्य सार्वजनिक कार्य : आपदा की स्थिति में राहत कार्यों के लिए अस्थाई व्यवस्था, विकलांगों के लिए मोटरयुक्त व्हीलचेयर, नाव की खरीद आदि (यह राज्य के नियमों पर निर्भर करता है)

स्वैच्छिक अनुदान (कुछ मामलों में) : कुछ राज्यों में, विधायक अपने विवेकाधिकार से जरूरतमंदों को आर्थिक सहायता या उपचार के लिए भी राशि दे सकते हैं।

विधायक निधि के खर्च से संबंधित नियम

स्थायी संपत्ति का निर्माण: निधि का उपयोग ऐसी स्थायी संपत्तियों के निर्माण के लिए किया जाता है, जो सार्वजनिक उपयोग के लिए होती हैं।

उपायुक्त की भूमिका: विधायक कार्यों का सुझाव उपायुक्त को देते हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निधि का उपयोग दिशानिर्देशों के अनुसार हो, उपायुक्त की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

लाभार्थी संगठन: कुछ विशेष मामलों में, समाज सेवा से जुड़े पंजीकृत और प्रतिष्ठित संगठनों को भी निधि दी जा सकती है। ऐसे संगठनों को सरकार के साथ एक औपचारिक अनुबंध करना होता है, और उन्हें अपनी वार्षिक रिपोर्ट भी देनी होती है।

ऑनलाइन निगरानी: कई राज्यों ने विधायक निधि के उपयोग में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन निगरानी प्रणाली भी लागू की है।

आपके विधानसभा क्षेत्र में भी विधायक निधि का सही उपयोग किया जा रहा या नहीं, यह जानना आपका अधिकार है और इसके सम्बन्ध में पूरी जानकारी के लिए आप सूचना के अधिकार में भी प्राप्त कर सकते है।

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