चैत्र नवरात्र 2025 में विशेष संयोग: पांच बार सर्वार्थसिद्धि व चार बार रवियोग

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चैत्र नवरात्र का प्रारंभ हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से हुआ। इस बार नवरात्र आठ दिनों के होंगे, जिसमें पांच बार सर्वार्थसिद्धि और चार बार रवियोग का संयोग बन रहा है, जो खास धार्मिक महत्व रखता है। इस विशेष समय में देवी दुर्गा की पूजा का फल अधिक शुभ माना गया है। तंत्र, मंत्र, यंत्र की सिद्धि के लिए भी यह समय अत्यंत फलदायी है।

शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में घट स्थापना और विशेष पूजन

चैत्र नवरात्र के पहले दिन शक्तिपीठ हरसिद्धि मंदिर में सुबह छह बजकर 15 मिनट पर घट स्थापना की गई। यहां पर नवरात्र के दौरान माता की पूजा का विशिष्ट तरीका अपनाया जाता है। मंदिर में हर दिन संध्या आरती के समय दीपमालिका जलायी जाएगी। इस दौरान, मंदिर के भक्त दीपमालिका की बुकिंग भी कर सकते हैं। साथ ही, गढ़कालिका मंदिर में भी दीपमालिका जलाने की व्यवस्था है।

सर्वार्थसिद्धि और रवियोग का महत्व

इस वर्ष चैत्र नवरात्र के दौरान विशेष रूप से पांच बार सर्वार्थसिद्धि और चार बार रवियोग का समय रहेगा। इन समयों का महत्व बहुत अधिक है, क्योंकि यह तिथि विशेष योगों के बनने का संकेत देती है। नवरात्र के दौरान इन अवसरों का लाभ पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों में अधिक से अधिक लिया जा सकता है।

नगर पूजा और अन्य धार्मिक कार्यक्रम

चैत्र नवरात्र की अष्टमी पर पांच अप्रैल को नगर पूजा का आयोजन किया जाएगा, जिसमें महंत रविंद्रपुरी महाराज द्वारा पूजा-अर्चना की जाएगी। इसके अलावा, गुदरी चौराहा स्थित माता महामाया और महालया की पूजा के बाद नगर के विभिन्न देवी-भैरव मंदिरों में पूजा-अर्चना की जाएगी।

माँ बगलामुखी और अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में आयोजन

नलखेड़ा में स्थित माँ बगलामुखी मंदिर को सजाया गया है और यहाँ विशेष पूजा का आयोजन किया जाएगा। इसके साथ ही, देवास के माता टेकरी पर भी विशेष पूजा और शृंगार होगा। यहाँ श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएँ जैसे बैरिकेड्स और पानी की व्यवस्था की गई है ताकि वे नवरात्रि के दौरान बिना किसी परेशानी के पूजा कर सकें।

विक्रम नवसंवत्सर का स्वागत

चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के साथ हिंदू नववर्ष विक्रम नवसंवत्सर सिद्धार्थी 2082 का भी आरंभ होगा। नगरवासी इस अवसर पर शिप्रा के दत्त अखाड़ा और रामघाट पर शंख और घंटे-घड़ियाल की मंगल ध्वनि के साथ नए वर्ष का स्वागत करेंगे।

इस नवरात्रि में देवी दुर्गा के साथ-साथ अन्य देवी-देवताओं की पूजा करने के लिए यह विशेष समय है, जो भक्तों को विशेष आशीर्वाद और सिद्धि प्रदान करेगा।

Soniya upadhyay
Author: Soniya upadhyay

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