
नई दिल्ली : इजराइल-अमेरिका V/s ईरान के युद्ध को अब एक महीना पूरा होने जा रहा है इस बीच पूरी दुनिया इस युद्ध की साक्षी बनी हुई है कि किस तरह अमेरिका ने ईरान से युद्ध शुरू करके पूरी दुनिया को मुसीबत में डाल दिया। चारों तरफ युद्ध जैसे हालत शुरू हो गए और यह कब खत्म होंगे इसका भी अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल है। जिस तरह डोनाल्ड ट्रंप ने सोचा था कि इराक के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनई को मारकर वह रातों-रात ईरान की सत्ता परिवर्तन कर उसे अपने हाथ में ले लेगा, लेकिन शायद वह भूल गया था कि उसके अलावा और भी देश अब शक्तिशाली हो चुके हैं।
जिस तरह से ईरान ने इजराइल और अमेरिका के हमले का जवाब दिया, पूरी दुनिया देख रही है उसने एक इतिहास रच दिया। वह अकेला ही इजरायल-अमेरिका सहित खाड़ी देशों कतर, कुवैत, सऊदी जैसे देशों में बमबारी कर रहा है लगातार मिसाइलें दागी जा रही है। ऐसे में उसका हारना या पीछे हटने के आसार कम दिखाई दे रहे है। इस युद्ध में दोनों तरफ काफी आर्थिक नुकसान और जनहानि हो रही है लेकिन बिना शर्तों के कोई भी देश युद्ध खत्म करने को तैयार नहीं। एक तरफ अमेरिका ने अपनी 15 शर्तों को ईरान के सामने रखा तो वहीं ईरान ने 5 शर्ते दुनिया के सामने रख दी। लेकिन अभी तक किसी भी बात पर सहमति नहीं बनी है और युद्ध लगातार जारी है। एक तरफ इजरायल ईरान के सैन्य और कई अलग-अलग हिस्सों में बमबारी कर रहा है तो वहीं जवाबी कार्रवाई में ईरान इजरायल के प्लांटो और खाड़ी देशों में मिसाइल दाग रहा है।

स्टेट ऑफ होर्मुज के बंद होने का असर
होर्मुज जलडमरूमध्य फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक अत्यंत महत्वपूर्ण संकरा समुद्री मार्ग है। यह ईरान को ओमान और UAE से अलग करता है। दुनिया का लगभग 20-30% कच्चा तेल (प्रतिदिन 2 करोड़ बैरल से अधिक) यहीं से गुजरता है, जिससे यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ बन जाता है। जब अमेरिका ने ईरान के साथ युद्ध शुरू किया तो ईरान ने अपने हिस्से वाला स्टेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। और ईरान की इजाजत के बिना अब वहां से एक भी जहाज गुजरना मुश्किल हो गया है ऐसा होने से देश में कच्चे तेल की आयात निर्यात व्यवस्था पर काफी असर पड़ा। बीते दिनों भारत के कुछ जहाज स्टेट ऑफ होर्मुज से गुजरने में सफल हुए लेकिन दुनिया में इसका बहुत गहरा असर पड़ रहा है अगर यह युद्ध लगातार जारी रहा तो दुनिया में ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है! हालांकि ईरान ने यह भी कहा है कि यह समुद्री मार्ग सिर्फ दुश्मनों के लिए बंद किया गया है दोस्तों के लिए यह मार्ग खुला हुआ है, लेकिन जो भी जहाज इस समुद्री मार्ग से गुजरते हैं तो उन्हें ईरान की इजाजत लेना पड़ेगी। अमेरिका ने पूरी दुनिया से मदद मांगी, लेकिन उसे समर्थन नहीं मिल रहा।
अमेरिका-इज़राइल-ईरान युद्ध के वैश्विक असर:
ऊर्जा और आर्थिक संकट: वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा के कारण यूरोप और एशिया में भारी ऊर्जा संकट हो सकता है। महंगाई बढ़ेगी और वित्तीय बाज़ार अस्थिर हो सकते हैं। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने या हमलों से तेल की शिपिंग ठप हो सकती है, जिससे BBC के अनुसार वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला चरमरा सकती है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें और एलपीजी आपूर्ति में व्यवधान से भारत की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। यह युद्ध अमेरिका और उसके सहयोगियों (जैसे यूरोप) के बीच दरार पैदा कर सकता है और BBC के अनुसार वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है। Greenpeace के अनुसार, इस तरह के युद्धों का पर्यावरण पर दशकों तक गहरा और विषाक्त प्रभाव पड़ता है।

क्या है ग्रेटर इजरायल?
संयुक्त राज्य अमेरिका और इजरायल के अधिकारियों द्वारा हाल ही में “ग्रेटर इजरायल” की अवधारणा का समर्थन करने वाली टिप्पणियों ने पूरे क्षेत्र में खतरे की घंटी बजा दी है और एक ऐसे दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला है जिसके बारे में पहले सार्वजनिक रूप से बहुत कम बात की जाती थी। पिछले हफ्ते अमेरिकी दक्षिणपंथी पॉडकास्टर टकर कार्लसन द्वारा प्रसारित एक साक्षात्कार में इज़राइल में अमेरिकी राजदूत माइक हकाबी के साथ हुए विवाद ने इस मौजूदा बवाल को जन्म दिया। कार्लसन, जो पिछले एक साल से इज़राइल के मुखर आलोचक रहे हैं, ने हकाबी से बार-बार पूछा कि क्या वे मिस्र में नील नदी और इराक में यूफ्रेट्स नदी के बीच की पूरी भूमि पर इज़राइल के नियंत्रण का समर्थन करते हैं। एक ईसाई ज़ायोनिस्ट हकाबी इस विश्वास को अस्वीकार नहीं करेंगे कि बाइबिल ने उस भूमि का वादा इज़राइल को किया था – भले ही अब इसमें मिस्र, इराक, जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब और सीरिया का पूरा या आंशिक हिस्सा शामिल है। ओर इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए इजरायल के प्रधानमंत्री ने पुरी दुनिया को युद्ध में झोंक दिया।
ईरान ने मिसाइलों पर THANK YOU INDIA लिखा
ईरान ने इजरायल पर मिसाइल हमले के दौरान अपनी मिसाइलों पर “THANK YOU INDIA” और “शुक्रिया कश्मीर” लिखकर भारत के प्रति आभार व्यक्त किया है। यह एक सांकेतिक कदम था, जिसे ईरान द्वारा जारी 83वें मिसाइल हमले के दौरान सोशल मीडिया पर देखा गया, जो भारत के संभावित नैतिक समर्थन को दर्शाता है। इसके अलावा ईरान ने जर्मनी, पाकिस्तान और स्पेन जैसे देशों के लिए भी धन्यवाद संदेश लिखे। इस युद्ध के माहौल में भी, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। ईरानी सेना (IRGC) के इस कृत्य को भारत के साथ अपने अच्छे संबंधों को उजागर करने के रूप में देखा जा रहा है।









