सालों से जमे बाबु सरकारी दफ्तर में मनमानी करने लगे : शिकायतकर्ता
इंदौर : (शाहनवाज शेख) पूरे संभाग से लोग अपनी शिकायतें और आवेदन लेकर बड़ी उम्मीद के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यालय पहुंचते हैं, अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी तो हर किसी के कार्य को जल्द और पूर्ण रूप से करने का प्रयास करते हैं लेकिन उनके नीचे बैठे बाबू उनकी अनुपस्थिति में कार्यालय को अपने निजी ढंग से संचालित करने का प्रयास करते हैं? ऐसा ही एक मामला इंदौर एनवीडीए कार्यालय में देखने को मिल रहा है, जहां स्टेनो सुरेंद्र भार्गव शिकायतकर्ता को ही धमकाने और गुमराह करने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं।
अपनी शिकायत का परिणाम जानने के लिए जब शिकायतकर्ता साजिद पिता रशीद कुरेशी इंदौर के विजयनगर स्थित नर्मदा सदन सेक्टर बी स्कीम 74 पहुंचे तो वहां सालों से एक स्थान पर पदस्थ स्टेनो सुरेंद्र भार्गव की भाषा शैली में अभद्रता दिखाई दी। उनसे मिलकर ऐसा प्रतीक हुआ कि वह स्वयं को ही सर्वश्रेष्ठ अधिकारी के रूप में दर्शाने का प्रयास कर रहे हैं। वह फरियादी से कार्यालय नहीं आने, खुद के फैसले को अंतिम फैसला बताने पर जोर दे रहे थे। शायद यह सालों से एक ही स्थान पर पदस्थ होकर यह भूल गए कि वह सिर्फ स्टेनो के पद पर कार्यरत है ना की प्रमुख अधिकारी के रूप में। ऐसे बाबुओं की वजह से कई शिकायतकर्ता और फरियादी की शिकायत आला अधिकारियों तक नहीं पहुंच पाती? क्योंकि अधिकारी के न मिलने पर शिकायतकर्ता उनके नीचे बैठे बाबू से ही संपर्क करता है और ऐसे समय अधिकारी का बाबू खुद को ही अधिकारी समझ बैठता है। कई बार यह भी देखने को मिलता है कि अधिकारी के न होने पर बाबू पूरी मदद करता है लेकिन यहां कुछ और ही देखने को मिला। उक्त मामले में जब शिकायतकर्ता ने स्टेनो सुरेंद्र भार्गव से कहा कि हमने इस भूखंड की लड़ाई में अपने पिता को भी खो दिया है तो स्टेनो का जवाब सुनिए; – “वह कहते हैं कि तुम्हारा बाप किसी और कारण से मरा होगा, और यह भूखंड तो भूल जाओ यह मैंने किसी और को दे दिया है।” फरियादी ने कहा कि इस मामले का जांच प्रतिवेदन भी आया है जो स्पष्ट रूप से यह दर्शाता है कि हम इस प्रकरण में सही है तो स्टेनो भार्गव कहते हैं;- ” मैं कोई जांच वॉच को नहीं जानता, यहां मैंने जो कह दिया सालों से वही होता आ रहा है।”
क्या है मामला, क्यों आयुक्त श्री सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे?
धरमपुरी पुनर्वास में एक भूखंड स्वामी से उसके भूखंड क्रमांक 158 को हड़पने के प्रयास किए जा रहे थे जिसमें मनीष पिता प्रकाश चंद निवासी धामनोद और स्थानीय एनवीडिए अधिकारी सम्मिलित थे। इसी दौरान भूखंड स्वामी की 26 मई 2025 को मृत्यु भी हो गई थी। इसके बाद भूखंड स्वामी के पुत्र शिकायतकर्ता साजिद कुरैशी ने उक्त मामले को लेकर इंदौर संभाग के पूर्व आयुक्त दीपक सिंह को शिकायत दर्ज कराई थी, इसके बाद आयुक्त श्री सिंह ने तत्काल मामले को संज्ञान में लेते हुए निष्पक्ष और स्पष्ट जांच के निर्देश दिए थे। कुछ दिनों बाद मौका मिलान हुआ, दल द्वारा जांच की गई और जांच प्रतिवेदन इंदौर एनवीडीए कार्यालय भेजा गया लेकिन वहां सालों से एक स्थान पर पदस्थ स्टेनो सुरेंद्र भार्गव अपनी मनमानी के चलते शिकायतकर्ता को ही धमकाने और गुमराह करने का काम करने लगे थे जिसको लेकर शिकायतकर्ता ने पुनः वर्तमान आयुक्त डॉ सुदामा पी खाड़े को लिखित पत्र देकर जांच प्रतिवेदन के अनुसार प्रकरण का निराकरण करने के लिए मांग की। और एनवीडीए कार्यालय के स्टेनो सुरेंद्र भार्गव के इस रवैये के प्रति नाराजगी व्यक्त की। जिस पर नवागत आयुक्त ने शिकायतकर्ता की शिकायत को सुना और निराकरण के निर्देश दिए।
पूर्व में दीपक गंगराड़े और वर्तमान में सुरेंद्र भार्गव का रवैया एक जैसा
धरमपुरी पुनर्वास के सेक्टर 12 भूखंड क्रमांक 158 के भूखंड स्वामी रसीद पिता शरीफ को अपने ही भूखंड के लिए जिस तरह से पूर्व में उपयंत्री दीपक गंगराड़े ने प्रताड़ित किया था, वैसे ही उनकी मृत्यु के बाद उनके पुत्र को एनवीडीए इंदौर कार्यालय के स्टेनो सुरेंद्र भार्गव द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार यह भी जानकारी मिली है कि मनीष पिता प्रकाश चंद सेठी और सुरेंद्र भार्गव की गुप्त मुलाकात हो चुकी है इसके बाद उनकी भाषा शैली में बदलाव हुआ है शायद कुछ गड़बड़ होने की आशंका दिखाई दे रही है।
फिलहाल यह मामला अब इंदौर आयुक्त डॉ सुदामा पी खाड़े के समक्ष है और शिकायतकर्ता को वरिष्ठ अधिकारियों से सत्य निष्पक्ष फैसले की उम्मीद है।









