उच्च न्यायालय ने दिए आदेश : पुनर्वास विस्थापितों के लिए खुशखबरी, दो माह में होगी आवंटित भूखंडों की रजिस्ट्री

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मेधा पाटकर की याचिका पर हाईकोर्ट ने दिया दिवाली तोहफा 

मनावर : (शाहनवाज शेख) धार, बड़वानी, खरगोन और अलीराजपुर जिले में दो दशक से अधिक समय से परेशान सरदार सरोवर बांध प्रोजेक्ट के हजारों पीड़ितों को हाईकोर्ट ने अब राहत की खबर दी है सरदार सरोवर पीड़ितों के लिए मेधा पाटकर लगातार आवाज उठाते आई है और वर्तमान में भी वह प्रभावितों के लिए हर संभव प्रयास करती है। पीड़ितों की याचिका पर हाई कोर्ट ने अंतरिम फैसला दिया गया है जिसमें जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस विनोद कुमार द्विवेदी की पीठ ने धार, बड़वानी, खरगोन और आलीराजपुर कलेक्टरों को दो माह के अंदर सभी पीड़ितों को आवंटन पत्र अभिलेखों में उपलब्ध दस्तावेज के आधार पर जमीन रजिस्ट्री करवाने के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ता का कहना था कि सरकार ने भूखंड आवंटित किए और विधिवत एटीआर सूची में नाम भी दर्ज किया परंतु भूखंडों का पंजीयन नहीं कराया। इस सुनवाई पर हाई कोर्ट ने दो माह के अंदर रजिस्ट्री करने का अंतरिम आदेश दिया है। न्यायालय ने कहा कि वह शासन की प्रस्ताव से प्रभावित नहीं है क्योंकि साल 2002 से हजारों विस्थापितों को पुनर्वास नीति के तहत भूखंड दिए गए थे परंतु इन आवंटन पत्रों को भारतीय पंजीयन अधिनियम 1908 की धारा 17 के तहत अब तक पंजीयन नहीं किया गया है इस वजह से विस्थापितों को नामांतरण, सीमांकन, बटवारा, गिरवी, विक्रय या किसी अन्य व्यक्ति के नाम हस्तानांतरण जैसे अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं यदि उनका आवंटन पत्र खो जाता है या नष्ट हो जाता है तो नया पत्र प्राप्त करना भी अत्यंत कठिन होगा इसलिए न्यायालय ने इस कार्य को प्राथमिकता से लेने का आदेश दिया है।

कोर्ट के निर्देश 

चारों कलेक्टर कमेटी बनाएंगे जिसमें अनुविभागीय अधिकारी तहसीलदार और उप पंजीयक होंगे, यह कमेटी भूमि के विस्थापितों के पक्ष में या कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम पर रजिस्ट्री करेगी। रजिस्ट्री के बाद राजस्व अभिलेख में उनके नाम का नामांतरण और राजस्व मानचित्र में सुधार करेगी तपश्चात संबंधित स्थानीय निकाय पंचायत या नगर पालिका अपने अभिलेखों में नाम दर्ज करेगी। एनवीडीए और नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण एक सक्षम अधिकारी को अधिकृत करेंगे जो कलेक्टर द्वारा गठित कमेटी का सदस्य होगा। भविष्य में किसी भी प्रकार की दीवानी या राजस्व विवादों से बचने के लिए निष्पादित को रजिस्ट्री के संबंधित भूमि की पहचान क्षेत्रफल, माप, दिशा और सीमाएं दर्ज की जाएगी। कोर्ट आदेश का पालन प्राथमिकता के आधार पर जिला मुख्यालय में सिविल लगाकर किया जाएगा।

न्यायालय ने यह भी कहा 

न्यायालय के आदेश में यह भी है कि डॉ राजोरा और याचिकाकर्ता मेघा पाटकर की भी जिम्मेदारी तय है, रजिस्ट्री करवाना डॉक्टर राजोरा की जिम्मेदारी होगी वही मेधा पाटकर को भूमि विस्थापितो और कमेटियों के बीच समन्वयक में स्थापित करने का काम सोपा गया है।

आवंटित पत्रों का एटीआर से मिलान करे कमेटी : विस्थापित

पुनर्वास स्थल पर कई विस्थापित ऐसे भी हैं जिनको तत्कालीन अधिकारियों ने एक भूखंड को दो-दो व्यक्तियों के नाम आवंटित किए हैं। जो अभी तक परेशान हो रहे है। ऐसी दशा में ए.टी.आर. सूची में दर्ज भूखंड क्रमांक देखकर मिलान करना जरूरी होगा। अन्यथा जालसाजी से बनाए दस्तावेज हावी होंगे। उदाहरण के रूप में देखा जा सकता है कि धार जिले के धरमपुरी पुनर्वास में सेक्टर 12 स्थित भूखंड क्रमांक 158 रसीद पिता शरीफ को आवंटन होकर विधिवत ए.टी.आर. की सूची के सरल क्रमांक 582 के स्पष्ट रूप से दर्ज है, बावजूद इसके मनीष पिता प्रकाशचंद ने स्वयं को मिले भूखंड क्र 1363 को छोड़कर अन्य भूखंड स्वामी के मौके का भूखंड को हड़पना चाहता था। जबकि विधिवत ए.टी.आर. के सरल क्रमांक 113 पर उनके नाम का भूखंड क्र 1363 दर्ज है। वही इंदौर संभाग आयुक्त के निर्देश पर की गई जांच में प्रतिवेदन के अनुसार रसीद पिता शरीफ को एक ही भूखंड आवंटित हुआ था जिस पर वह काबिज है, वही मनीष सेठी को चार-चार बार संशोधित कर दिया गया है।

भविष्य में ऐसे कई प्रकरण सामने आएंगे लेकिन कमेटी को इन बातों का ध्यान रखते हुए आवंटन भूखंड और ए.टी.आर सूची दोनों का मिलान जरूर करना चाहिए।

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