नर्मदा भवन में नहीं मिल रहे अधिकारी, बाबू जानकारी देने से बच रहे, आवेदक का दर्द झलका, – कितने प्रताड़ित हुए होंगे पिता!
इंदौर : मप्र.- धार जिले के धरमपुरी का एक प्रकरण जिसमें एक भूखंड स्वामी को अपने ही कब्जे के भूखंड पर निर्माण करने के लिए साल भर पुनर्वास कार्यालयो के चक्कर लगाए और अंत में संबंधित स्थानीय अधिकारियों की प्रताड़ना झेलते हुए सदमे में उनकी फौत हो गई? स्थानीय तौर पर इस मामले को दबाया गया, जिले से भी कलेक्टर ने भी नाराजगी जाहिर करते हुए जनसुनवाई के दौरान 27 मई 2025 को जांच के आदेश दिए थे। लेकिन यह प्रकरण मृतक आवेदक के पुत्र साजिद कुरैशी के द्वारा इंदौर संभाग आयुक्त के पास पहुंच गया था। तत्कालीन आयुक्त दीपक सिंह ने दल बनाकर बाहरी अधिकारियों से जांच कराने के आदेश दिए। भू अर्जन अधिकारी प्रमोद गुर्जर (SDM) के निर्देशन में दल प्रभारी तहसीलदार, पटवारी, आरआई जैसे अधिकारियों के बीच मौके पर जांच की गई। जांच में मृतक आवेदक रसीद पिता शरीफ के दस्तावेज सही पाए गए, ATR सूची में विधिवत नाम दर्ज तथा कब्जा होकर निर्माण करना पाया गया। वही अनावेदक मनीष पिता प्रकाश चंद के विषय में पाया गया था कि पूर्व में कई बार भूखंड संशोधित हुए। ओर ATR सूची में भी नाम अन्य भूखंड पर दर्ज है।
श्री सिंह के स्थानांतरण के बाद यह जांच प्रतिवेदन वर्तमान संभाग आयुक्त डॉ सुदामा पी खाड़े के समक्ष प्रस्तुत हुआ। जिसके बाद आयुक्त ने आवेदक ओर अनावेदक के सामने भू अर्जन अधिकारी एवं संबंधित अधिकारियों से प्रकरण संबंधित सवालों के जवाब जाने, प्रकरण से जुड़े दस्तावेज देखे। पूरी तरह मामले को समझ कर 1 माह में आदेश देने की बात कही थी
प्राप्त जानकारी अनुसार आयुक्त कार्यालय से समयावधि में प्रकरण संबंधित आदेश जारी तो हो गए लेकिन एनवीडिए कार्यालय नर्मदा भवन इंदौर से उसे 3 हफ्तों के बाद भी मनावर नहीं भेजा। जबकि भू अर्जन अधिकारी को इसका निराकरण करते हुए फैसला देना था। इस दौरान आवेदक साजिद पिता रशीद कुरेशी ने एनवीडिए कार्यालय नर्मदा भवन इंदौर के कई चक्कर लगाए। लेकिन वहां बड़े अधिकारी नहीं मिले। पता करने पर कर्मचारी ने बताया कि हमें कोई जानकारी नहीं है। बड़े साहब आयेंगे वही बताएंगे कि आगे क्या होगा। आवेदक मनावर कार्यालय भी पहुंचा लेकिन वहां बताया गया कि फाइल अभी यहां नहीं पहुंची है। आवेदक ने कहा कि कितने दिनों से चक्कर लगा रहा लेकिन असंतुष्ट रहा। मैं अपने पिता के प्रताड़ित होने का दर्द महसूस कर रहा हु।
अब सवाल यह पैदा हो रहा है कि जब संभाग आयुक्त के निर्देश के बाद भी इस फाइल को इंदौर से मनावर क्यों नहीं भेजा जा रहा है? आवेदक ने पुनः आयुक्त कार्यालय शिकायत करने की बात करते हुए कहा की। पूरा परिवार इस फैसले ओर पिता के भूखंड के न्याय के लिए प्रतीक्षा कर रहा है। उन्होंने कहा कि हम एमवीडीए को उच्च न्यायालय में चुनौती देने में भी पीछे नहीं हटेंगे। मामला हमारे पिता के साथ हुई प्रताड़ना और न्याय का है। मामले को जानते हुए इस प्रकरण में 17 वर्षों से धरमपुरी में उपयंत्री के पद पर पदस्थ दीपक गंगराड़े और इंदौर कार्यालय के पदस्थ सुरेंद्र भार्गव की भूमिका संदिग्ध रही है।









