आदिवासी सांस्कृतिक एकता महासम्मेलन में समाज के नेताओं ने दहाड़ लगाई

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नेता प्रतिपक्ष, राष्ट्रीय आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष और जयस संरक्षक भी रहे मौजूद

बुरहानपुर : (मप्र.) जिले के नेपानगर में 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महा सम्मेलन का आयोजन किया गया है। इस सम्मेलन में देशभर के कई राज्यों से आदिवासी समाज के नेता, आदिवासी संस्थाओं के अध्यक्ष, विधायक, मध्य प्रदेश के नेताप्रतिपक्ष सहित हजारों की संख्या में समाजजनों की मौजूदगी रही। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में आदिवासियों के हित में पर्यावरण बचाओ, जल, जंगल, जमीन तथा पानी के संरक्षण जैसे मुद्दों पर ज़ोर डाला गया। प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात, छत्तीसगढ़ सहित देश विदेश से आदिवासी समाज के हजारों प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में हिस्सा लिया।

आयोजन समिति के बिलर सिंह जमरा ने बताया कि तीन दिवसीय इस महा सम्मेलन में विलुप्त होती आदिवासी संस्कृति के संरक्षण जैसे गंभीर विषयों पर गहन मंथन हुआ। महासम्मेलन में कई राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया है, जिनमें प्रदूषण और पर्यावरण असंतुलन प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में कहीं अतिवर्षा तो कहीं सूखा जैसी स्थितियां प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने का परिणाम हैं। आदिवासी एकता परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अशोक चौधरी ने जंगल, पहाड़ और नदियों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया। आदिवासी एकता परिषद महिला विंग की पूर्व अध्यक्ष कुसुम रावत ने पृथ्वी को बचाने और आने वाली पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि दुनिया में केवल 3 प्रतिशत पानी ही पीने योग्य है, और इसके दुरुपयोग पर विचार करना आवश्यक है।

नेताप्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने कहा

मध्य प्रदेश के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार ने आदिवासी सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि मैं पूरे देश के आदिवासी समाज से अपील करता हूँ कि अपने लिए अलग धर्म कोड की मांग हम सब मिलकर करें। आइये हम सब आदिवासी अपने समाज के लिए अपने अधिकार के लिए संकल्प लें। मेरे आदिवासी भाईयों याद रखना कि

इस सियासत की विरासत हम हैं, और इस विरासत की सियासत भी हम करेंगे। बुरहानपुर के नेपानगर में आयोजित 33वें आदिवासी सांस्कृतिक एकता महा सम्मेलन में सहभागी बनना मेरे लिए गौरव और आत्मीय अनुभव रहा। मध्य प्रदेश के साथ-साथ महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात से आए आदिवासी समाज के हजारों प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इस सम्मेलन को एकता, चेतना और संस्कृति का जीवंत उत्सव बना दिया।

आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष ने भरी हुंकार 

आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ विक्रांत भूरिया ने कहा कि इस अवसर पर आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं, भाषा, रीति-रिवाजों और अस्मिता पर विस्तार से चर्चा हुई। हमने यह संकल्प लिया कि आदिवासी संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए संगठित होकर संघर्ष करेंगे और आने वाली पीढ़ियों तक अपनी विरासत को सुरक्षित पहुँचाएंगे। यह महासम्मेलन आदिवासी समाज की एकता, आत्मसम्मान और अधिकारों की मजबूत आवाज़ बना। हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान और ताकत है—इसे बचाना हमारा सामूहिक दायित्व है।

जयस राष्ट्रीय संरक्षक ने भी हिस्सा लिया

मनावर विधायक और जयस के राष्ट्रीय संरक्षक डॉ हीरालाल अलावा ने बुरहानपुर जिले के चैनपुरा मे आदिवासी एकता सांस्कृतिक महासम्मेल मे उपस्थित होकर आदिवासियत की इस लड़ाई के लिए मिलकर एकजुट होने का संकल्प लिया कार्यक्रम की ऐतिहासिक सफलता की आदिवासी एकता परिषद की बहुत बहुत बधाई दी।

कार्यक्रम में विधायक झूमा सोलंकी, सेना महेश पटेल, राजेन्द्र मंडलोई, मोन्टू सोलंकी, रामू टेकाम, छाया मौर्या, जेवियार मेड़ा, सुनील स्टार, रिंकू टांक, ग्यारसी लाल रावत, विवेक कटारा सहित तमाम नेता एवं जनप्रतिनिधिगण सम्मिलित हुए।

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